पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा हो गई लेकिन अभी तक यह फैसला नहीं हुआ है कि असली तृणमूल कांग्रेस कौन है। चार मई को विधानसभा का चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी में टूट हो गई थी। प्रदेश में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 60 से ज्यादा विधायक अलग हो गए हैं। गौरतलब है कि ममता के 80 विधायक जीते थे, जिनमें से 20 के करीब विधायक उनके साथ हैं। ऋतब्रत बनर्जी गुट को स्पीकर ने असली तृणमूल के तौर पर मान्यता दी है। लोकसभा सदस्यों में भी ममता बनर्जी की पार्टी के 28 सांसदों में से 20 सांसद अलग हो गए हैं और त्रिपुरा की एक गुमनाम पार्टी एनसीपीआई में शामिल हो गए हैं। अब तकनीकी रूप से देखें तो पश्चिम बंगाल में एक ममत बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस है, एक ऋतब्रत बनर्जी की है और एक एनसीपीआई है।
असली पार्टी कौन है, किसके पास पार्टी का झंडा और चुनाव चिन्ह रहेगा इसका फैसला चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट को करना होता है। दोनों जगह ममता बनर्जी की पार्टी का मामला लंबित है। ममता और ऋतब्रत दोनों का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला है और असली पार्टी होने का दावा किया है। दो सीटों के लिए बुधवार, नौ सितंबर से नामांकन शुरू होगा। अगर जल्दी फैसला नहीं होता है तो बहुत कंफ्यूजन बनेगा। तृणमूल कांग्रेस का झंडा और दो फूल का चुनाव चिन्ह कौन इस्तेमाल करेगा यह तय नहीं हो पाएगा। ऐसे में हो सकता है कि चुनाव आयोग दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों को अलग अलग चुनाव चिन्ह आवंटित करे और थोड़े समय के लिए दो फूल का चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दे। यह भी पता नहीं है कि ऋतब्रत बनर्जी और एनसीपीआई को उपचुनावों में उम्मीदवार देना है या नहीं। लेकिन अगर ऋतब्रत बनर्जी खेमा उम्मीदवार नहीं देता है और भाजपा का समर्थन करता है तब भी वह नहीं चाहेगा कि दो फूल चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल ममता की पार्टी करे।
