Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

इसरो से पलायन और मंत्रीजी का नजरिया

isro gaganyaan mission

isro gaganyaan mission

भारत की सबसे प्रतिष्ठित और वास्तविक अर्थों में भारत का सम्मान बढ़ाने वाली एजेंसी का नाम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो है। इसके वैज्ञानिकों ने जो उपलब्धि हासिल की है वह अद्भुत है। उनकी योग्यता और क्षमता के कारण भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में दुनिया के तीन या चार सबसे ऊपर के देशों में शामिल है। लेकिन पिछले कुछ समय से इसरो से पलायन हो रहा है। उसके वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारी नौकरी छोड़ रहे हैं। पिछले एक साल में 120 के करीब लोगों ने इसरो छोड़ी है। अब सरकार ने ग्रुप ए के वैज्ञानिकों और अन्य तकनीकी कर्मचारियों के इसरो छोड़ने के नियमों के सख्त बनाया गया है। अब वीआरएस की मंजूरी दिल्ली से होगी।

हालांकि सरकार ने इस बात का वस्तुनिष्ठ आकलन नहीं किया है कि किस वजह से इतनी बड़ी संख्या में लोग इतने प्रतिष्ठित संस्थान को छोड़ रहे हैं। इस बारे में सरकार का रवैया क्या वह प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह के एक बयान से समझा जा सकता है। उनसे इसरो से लोगों के नौकरी छोड़ने पर पूछा गया तो उनका जवाब था कि ‘ऐसे कितने लोग आए गए लेकिन इसरो चलता रहा है’। सोचें, इस अहंकार और कैजुअल एप्रोच पर! इसरो के वैज्ञानिक क्या ऐसे वैसे लोग हैं या ऐरे गैरे हैं, जिनके बारे में इस तरह की टिप्पणी की जाएगी? और वैसे भी अगर ये ऐसे वैसे लोग हैं तो इनको रोकने के लिए क्यों नियम बदले जा रहे हैं? अगर उनका कोई महत्व नहीं है तो जाने दीजिए? ऐसा लग रहा है कि सरकार के मन में ज्ञान के प्रति कोई सम्मान नहीं है। तभी इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं और वैज्ञानिकों को बेहतर माहौल, सुविधा, संसाधन आदि देकर रोकने की बजाय जोर जबरदस्ती रोकने की कोशिश हो रही है। हकीकत यह है कि अनुभवी लोगों की कमी से इसरो का गगनयान और स्पेस स्टेशन दोनों का मिशन प्रभावित हुआ है और उसमें देरी हुई है।

Exit mobile version