प्रभारी बनने के साथ ही सचिन पायलट ने पंजाब कांग्रेस के अंदर का झगड़ा सुलझाने के लिए पहल शुरू कर दी है। उन्होंने दो टूक अंदाज में कह दिया है कि पंजाब में कांग्रेस पार्टी मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करके चुनाव नहीं लड़ेगी। असल में इसी बात को लेकर पंजाब कांग्रेस में घमासान छिड़ा है। पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर के सांसद चरणजीत सिंह चन्नी चाहते हैं कि उनको सीएम का फेस घोषित किया जाएगा। ध्यान रहे वे पिछले चुनाव के समय पंजाब के सीएम थे और कांग्रेस ने उनको सीएम का चेहरा बना कर चुनाव लड़ा था। वे खुद दो सीटों से चुनाव लड़े थे और दोनों से हार गए थे। कांग्रेस तो बहुत बुरी तरह से हारी। इसलिए कांग्रेस कम से कम उनको तो सीएम चेहरा नहीं ही बना रही थी। लेकिन उनको दिक्कत इस बात से थी कि प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग अघोषित रूप से सीएम दावेदार बन गए थे।
असल में पंजाब में कांग्रेस में पिछले 25 साल में दो बार सरकार बनी और दोनों बार मुख्यमंत्री वही बना, जो प्रदेश अध्यक्ष था। कैप्टेन अमरिंदर सिंह दोनों बार जब सीएम बने तो वे प्रदेश अध्यक्ष थे। इसलिए चन्नी को लग रहा था कि प्रदेश अध्यक्ष राजा वारिंग का दावा मजबूत है। इसलिए वे अपने को सीएम फेस घोषित कराने के लिए दबाव बना रहे थे। उनके अलावा दो अन्य जाट सिख नेता सुखजिंदर रंधावा और प्रताप सिंह बाजवा भी चाहते थे कि किसी तरह से यह घोषणा हो जाए कि राजा वारिंग सीएम पद के दावेदार नहीं हैं। इससे चुनाव में अगर कांग्रेस जीतती है तो उनका अवसर भी बने रहेगा। यह काम सचिन पायलट ने कर दिया है। उन्होंने ऐलान कर दिया है कि कोई सीएम का दावेदार नहीं होगा। पायलट ने यह भी कहा कि कांग्रेस सामूहिक नेतृत्व में लड़ेगी और राहुल गांधी के हाथ में प्रचार की कमान रहेगी। हालांकि दूसरी ओर कम से कम दो बड़ी पार्टियों आप और अकाली दल का चेहरा घोषित है। भगवंत सिंह मान और सुखबीर बादल उधर से नेतृत्व संभालेंगे।
