पांच साल की देरी के बाद जनगणना शुरू होने वाली है। 2021 में होने वाली जनगणना का पहला चरण एक अप्रैल से शुरू होगा। पहले चऱण में मकानों की गिनती होगी। अगले साल दूसरे चरण में लोगों की गिनती की जाएगी। इस बार की जनगणना इसलिए खास है क्योंकि इस बार जातियों की गिनती होगी। हालांकि पहले चरण की जो अधिसूचवा जारी हुई उसके बाद विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया कि सरकार ने इसमें जातियों की गिनती का जिक्र नहीं किया है। इसके साथ ही यह भी मांग शुरू हुई कि सरकार जातियों की गिनती करने से पहले सभी पार्टियों के साथ सलाह मशविरा करे।
कांग्रेस पार्टी से लेकर समाजवादी पार्टी और डीएमके तक लगभग सभी विपक्षी पार्टियों ने कहा है कि जाति गणना से पहले विचार विमर्श किया जाना चाहिए। सभी पार्टियों के साथ बैठक होनी चाहिए। असल में पार्टियों को अंदाजा नहीं है कि जातियों की गिनती किस तरह से होनी है। कहा जा रहा है कि फॉर्म में सिर्फ जाति लिखने का प्रावधान होगा। अन्य पिछड़ी जाति के नेताओं को लग रहा है कि फॉर्म में अगर ओबीसी स्पेसिफाई नहीं किया गया तो संख्या में बाद में गड़बड़ी हो सकती है। यह आशंका दूसरी जातियों को भी हो सकती है। इसलिए सभी पार्टियां चाहती हैं कि जनगणना प्रपत्र को लेकर विचार विमर्श हो। अभी सरकार इसके लिए तैयार नहीं है। जानकार सूत्रों का कहना है कि सरकार को लग रहा है कि अगर विपक्षी पार्टियों के साथ मीटिंग के बाद जनगणना प्रपत्र जारी होगा तो विपक्षी पार्टियां भी जाति गणना का श्रेय लेने लगेंगी, जबकि केंद्र सरकार चाहती है कि पूरा श्रेय उसको मिले।
