जातिवार जनगणना को दफन मानिए
दिलचस्प है कि 1931 में जब आखिरी जातिवार जनगणना हुई थी तब 4147 जातियां गिनी गई थी। 1980 के दशक में समाजशास्त्री कुमार सुरेश सिंह के नेतृत्व में भारतीय समाज के व्यापक सर्वेक्षण में भी करीब 3800 जातियां गिनी गई थी। यह सर्वेक्षण रिपोर्ट 43 खंडों में उपलब्ध है। पर सरकार चाहेगी तब ये हिसाब हैं। अगर वही टालना चाहती है तो जातिवार जनगणना के सवाल को दफन ही मानिए। माना जाता है कि 2011 की जनगणना में जाति की सूचना जोड़ने का फैसला जिस राजनैतिक दबाव में लिया गया उसे बनाने में शरद यादव की भूमिका सबसे बड़ी थी।...