मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी पार्टियों के गठबंधन यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक 30 सितंबर को दिल्ली में होने वाली है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ साझा आंदोलन की रूपरेखा बनेगी। ममता बनर्जी बहुत गंभीरता से इस पर विचार कर रही हैं। तभी उन्होंने करीब 30 साल के बाद सीपीएम के महासचिव एमए बेबी से बात की और राहुल गांधी को भी विपक्षी गठबंधन की मीटिंग के लिए तैयार किया। हालांकि कांग्रेस अपना प्रदर्शन कर रही है। 25 सितंबर को कांग्रेस ने प्रदेश की राजधानियों में प्रदर्शन किया तो 28 सितंबर को जिलों में प्रदर्शन करेगी। दूसरी ओर कॉकरोच जनता पार्टी भी आंदोलन की तैयारी कर रही है।
ध्यान रहे पिछली बार पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी पर जब सीजेपी ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था, तब विपक्ष एकदम अंधेरे में था और उसकी कोई तैयारी नहीं थी। तभी लेफ्ट और सपा जैसी पार्टियों ने उस आंदोलन का समर्थन किया। अब सपा हो या लेफ्ट या कांग्रेस और टीएमसी सब अपने आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। तब सीजेपी के आंदोलन का क्या होगा? सीजेपी ने ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, जो शनिवार को समाप्त हो गया। लेकिन उससे पहले ही उसने अल्टीमेटम की सीमा दो अक्टूबर तक बढ़ा दी। अब अगर सीजेपी का आंदोलन हुआ तो उसे कौन समर्थन देगा? क्या भीम आर्मी फिर से अपने लोगों को लेकर उतरेगी? अगर भीम आर्मी या किसी पार्टी ने समर्थन नहीं दिया तो सीजेपी के आंदोलन कामयाब होने के आसार नहीं हैं। हां, भाजपा जरूर उसका महत्व बढ़वा सकती है ताकि विपक्ष के आंदोलन की मैसेजिंग को कमतर किया जा सके। जेपी नड्डा को फिर से तो सीजेपी से बात करने में नहीं लगाया जाएगा?
