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विपक्ष परिसीमन का समर्थन नहीं करेगा

New Delhi, Mar 12 (ANI): Lok Sabha proceedings are underway during the Budget Session of Parliament, New Delhi, on Thursday. (Sansad TV/ANI Video Grab)

महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर पहले लग रहा था कि विपक्ष के सामने दुविधा है और विपक्षी पार्टियां इसमें उलझ जाएंगी। लेकिन अब धीरे धीरे विपक्ष ने अपना रुख स्पष्ट करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी यानी लोकसभा की दूसरी और तीसरी सबसे बड़ी पार्टियों ने अपना स्टैंड स्पष्ट कर दिया है। असल में दुविधा इस बात को लेकर थी कि अगर केंद्र सरकार की ओर से लाए जा रहे संविधान संशोधन बिल का विरोध किया जाता है तो विपक्षी पार्टियों को महिला आरक्षण का विरोधी बताया जाएगा। यह खतरा अब भी है लेकिन विपक्ष की ओर अब यह बताने का प्रयास किया जा रहा है कि सभी पार्टियां महिला आरक्षण के पक्ष में हैं लेकिन परिसीमन का समर्थन नहीं कर रही हैं। इसके लिए सिद्धांत रूप में पार्टियों का रुख तय किया जा रहा है और सर्वोच्च नेता इसे जाहिर कर रहे हैं।

कांग्रेस पार्टी की ओर से पार्टी के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके परिसीमन के प्रस्ताव पर सवाल उठाया। रमेश ने कहा कि महिला आरक्षण और परिसीमन का मामला व्यापक रूप से ध्यान भटकाने की योजना का हिस्सा है। रमेश ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि कैसे सरकार कह रही है कि परिसीमन के बाद उत्तर भारत के राज्यों का असर नहीं बढ़ेगा और दक्षिण के राज्यों का असर नहीं कम होगा? इसके लिए उन्होंने केरल की मिसाल दी और कहा कि केरल व उत्तर प्रदेश के बीच अभी 60 सांसदों का फर्क है, जो परिसीमन के बाद 90 सांसदों का हो जाएगा। इसी तरह से हर उत्तर भारतीय राज्य में ज्यादा सीटें बढ़ेंगी और उस अनुपात में दक्षिण में कम सीटें बढ़ेंगी। ध्यान रहे इस समय दक्षिण भारत में तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा का चुनाव भी होने वाला है। सो, कांग्रेस ने वहां की जनता को भी एड्रेस किया है और अपना इरादा भी स्पष्ट कर दिया है।

लगभग इसी लाइन पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी केंद्र सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि सरकार बना जनगणना कराए कैसे परिसीमन कर सकती है। वे चाहते हैं कि जैसा पहले प्रस्तावित है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणना के आधार पर ही परिसीमन क काम हो, वैसा ही होना चाहिए। अगर परिसीमन नहीं होता है तो महिला आरक्षण लागू करना संभव नहीं होगा। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल के बीच तीन दिन का सत्र बुलाया है। इसके लिए ही बजट सत्र का सत्रावसान नहीं किया गया। तीन दिन के इस सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन को नारी शक्ति वंदन कानून से अलग करने का प्रस्ताव लाया जाएगा। कहा जा रहा है कि सरकार अगले लोकसभा चुनाव और उसके साथ होने वाले विधानसभा चुनावों से महिला आरक्षण लागू करना चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केरल से लेकर असम तक अपनी सभाओं में कहने लगे हैं कि सरकार महिला आरक्षण लागू करने जा रही है। विपक्ष महिला आरक्षण का विरोध नहीं करेगा लेकिन परिसीमन का विरोध करेगा। सरकार चाहती है कि 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन का काम हो जाए और लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ा कर 816 कर दी जाएं। इसमें से एक तिहाई यानी 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएं। इसके लिए संविधान में संशोधन का विधेयक लाना होगा और विशेष बहुमत यानी दो तिहाई बहुमत से पास कराना होगा। विपक्ष के सहयोग के बगर यह संभव नहीं लग रहा है।

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