उत्तर प्रदेश में तो कहा जाता है कि योगी आदित्यनाथ की पुलिस ने रामपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव में इस मॉडल को लागू किया था लेकिन अब चुनाव आयोग ने वहां से सीख लेकर पश्चिम बंगाल में इसे लागू करने का फैसला किया है। इस मॉडल के तहत बुर्के वाली महिलाओं की जांच मतदान केंद्र के बाहर भी की जाएगी। ऐसे कह सकते हैं कि उनकी जांच दो बार या उससे ज्यादा बार भी हो सकती है। समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया था कि आजम खान के इस्तीफे से खाली हुई रामपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव में पुलिस ने मतदान केंद्र से बहुत पहले ही बैरिकेड लगा दिए थे और बुर्के वाली महिलाओं की जांच मतदान केंद्र के बाहर ही की जा रही थी। इतनी जगह बैरिकेड लगाए गए थे और इतनी जांच हो रही थी कि बहुत से लोग रास्ते से लौट गए।
बहरहाल, नियम यह कहता है कि बुर्के वाली महिला को मतदान केंद्र के भीतर जाकर ही अपना चेहरा दिखाना है। वही पर मतदाता सूची में लगी फोटो से उसका मिलान होगा और वोट डालने के लिए उंगली पर स्याही लगाई जाएगी। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने तय किया है कि मतदान केंद्र के बाहर ही उनकी जांच होगी। इसका जो एक कारण समझ में आ रहा है वह ये है कि आयोग को लग रहा है कि मतदान केंद्र के भीतर सारे राज्य सरकार के कर्मचारी होंगे। ध्यान रहे भाजपा के लोग पहले से आरोप लगाते रहे हैं कि राज्य सरकार के कर्मचारियों की मिलीभगत होती है। मतदान केंद्र के बाहर केंद्रीय बलों की तैनाती होगी। उनकी मौजूदगी में अगर जांच होती है तो बोगस मतदाता के पकड़े जाने का खतरा ज्यादा रहेगा। दूसरी बात यह है कि ऐसी जांच से बचने के लिए बहुत सी महिलाएं मतदान के लिए जाएंगी ही नहीं।
