Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

अमित शाह की छवि की भी चिंता थी

कहा जा रहा है कि 20 जुलाई को जंतर मंतर पर जैसी भीड़ जुटी और वहां से संसद मार्च के दौरान जैसा हंगामा हुआ उससे अमित शाह की ‘लौह पुरूष’ वाली छवि पर दाग लगा। भाजपा के जानकार नेताओं का कहना है कि उस घटनाक्रम से लगा कि अमित शाह का कानून व्यवस्था पर से नियंत्रण कम हुआ है और उनका प्रशासन कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को ठीक से हैंडल नहीं कर सका। तभी बताया जा रहा है कि इस बार जब सीजेपी ने 10 अक्टूबर को फिर से जंतर मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया तो गृह मंत्रालय ने तय किया कि पिछली घटना को किसी हाल में दोहराने नहीं दिया जाएगा। हालांकि पुलिस के अधिकारी और भाजपा के नेता भी मान रहे थे कि इस बार के प्रदर्शन को पहले की तरह समर्थन नहीं है। फिर भी कोई चांस नहीं लिया गया।

इस बार अमित शाह के गृह मंत्रालय ने तय कर लिया था कि किसी को भी जंतर मंतर नहीं पहुंचने देना है। बाकी कहीं भी प्रदर्शन हो वहां लोगों को रोका नहीं जाएगा। लेकिन उनको जंतर मंतर नहीं पहुंचने दिया जाएगा। तभी पिछले एक हफ्ते से जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे आम आदमी पार्टी के नेताओं को वहां तक नहीं पहुंचने दिया गया। आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज, पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, विधायक संजीव झा आदि जंतर मंतर गए तो उनको वहां से तुरंत हिरासत में लेकर बस में बैठा दिया गया और वहां से हटा दिया गया। इसी तरह राहुल गांधी और दूसरे नेता बस से जंतर मंतर की ओर बढ़े तो उन्हें भी दो सौ मीटर दूर ही रोक कर हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद 10 अक्टूबर को भी पुलिस और सरकार का पहला लक्ष्य किसी तरह से प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर पहुंचने से रोकने का था। इसके लिए जितनी ज्यादती हुई है उससे एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में भारत की छवि पूरी दुनिया में बिगड़ी है लेकिन पुलिस ने जंतर मंतर पर किसी को नहीं पहुंचने दिया।

Exit mobile version