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थोक में नाम काटने की समस्या

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तीसरे चरण में जैसे जैसे राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की मसौदा मतदाता सूची जारी हो रही है वैसे वैसे कई चीजों को लेकर विवाद बढ़ रहा है। एक विवाद फॉर्म सात का इस्तेमाल करके मतदाताओं के नाम कटवाने के लिए दायर होने वाले आवेदनों का है। गौरतलब है कि फॉर्म सात के तहत कोई व्यक्ति अपना या किसी अन्य व्यक्ति का नाम काटने का आवेदन कर सकता है। देश के कई हिस्सों में फॉर्म सात के जरिए थोक में नाम काटने के आवेदन दिए जा रहे हैं। गौरतलब है कि एसआईआर से पहले ही कांग्रेस पार्टी ने कर्नाटक में फॉर्म सात के जरिए ऑनलाइन आवेदन करके लोगों के नाम कटवाने के प्रयास का ब्योरा दिया। राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इसकी जानकारी दी थी।

अब कई राज्यों में ऐसी शिकायतें मिली हैं। झारखंड के गोड्डा जिले में भाजपा के बूथ लेवल एजेंट्स की ओर से बड़ी संख्या में फॉर्म सात जमा कराए गए हैं। हालांकि बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ के सजग होने से यह जानकारी सामने आ गई। यह देख कर हैरानी नहीं हुई कि भाजपा के बीएलए की ओर से नाम काटने के जो आवेदन दिए गए थे उनमें लगभग सभी नाम मुस्लिम मतदाताओं के थे। इसके बाद नियमों में कुछ बदलाव किया गया है। अब बीएलए की ओर से दिए जाने वाले आवेदनों की एक संख्या निश्चित की गई है। इस बीच देश के जाने माने वकील कपिल सिब्बल ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को इस पर ध्यान देना चाहिए। गौरतलब है कि झारखंड के गोड्डा जिले में मुस्लिम मतदाताओं के नाम काटने वाली याचिका दो मुस्लिम बीएलओ ने पकड़ी थी। हो सकता है कि कई जगह यह काम निर्विघ्न तरीके से चल रहा हो।

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