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बसपा को चुनाव लड़ना भी है या नहीं?

Lucknow, Jan 16 (ANI): Bahujan Samaj Party (BSP) supremo Mayawati addresses a press conference on her birthday, in Lucknow on Wednesday. (ANI Photo)

बहुजन समाज पार्टी और उसकी सुप्रीमो मायावती के परिवार का मामला खत्म ही नहीं हो रहा है। हर महीने, दो महीने में उनकी धारावाहिक का नया सीजन आ जाता है। हर बार एक ही कहानी दोहराई जाती है। एक सीजन में मायावती अपने भतीजे आकाश को उत्तराधिकार बनाती हैं और फिर अगले सीजन में उनको हटा देती हैं। उसके बाद वाले सीजन में फिर बनाती हैं और उसके बाद फिर हटाती हैं। इसमें बाकी कैरेक्टर आते जाते रहते हैं। बाकी कैरेक्टर में मायावती के भाई आनंद कुमार हैं, उनके छोटे बेटे ईशान आनंद हैं और आनंद कुमार के समधि यानी आकाश के ससुर सिद्धार्थ हैं।

सो, इस तरह की चेन बनती हैं मायावती, आनंद कुमार, आकाश आनंद, ईशान आनंद और अशोक सिद्धार्थ। पूरी कहानी इन पांच कैरेक्टर्स के इर्द गिर्द घूमती है। बाकी सारे लोग किनारे खड़े होकर तमाशा देखते हैं। हैरानी की बात है कि मायावती और बसपा के पैरों के नीचे से जमीन खिसकती जा रही है। नगीना के सांसद चंद्रशेखर जाटव वोट के सबसे बड़े दावेदार के तौर पर उभर गए हैं और ऐलान कर दिया है कि 2027 का विधानसभा चुनाव उनकी पार्टी लड़ेगी। गैर जाटव वोट पर भाजपा, सपा, कांग्रेस और अन्य पार्टियों की दावेदारी भी है।

बहरहाल, बसपा की कहानी के नए सीजन में एक बार फिर परिपक्वता की कमी के आधार पर मायावती ने आकाश आनंद को पार् के नेशनल कोऑर्डिनेटर पद से हटा दिया है। हालांकि उन्होंने इसकी आधिकारिक घोषणा करने की बजाय कहा है कि अभी वे राजनीति में कोई बड़ी भूमिका निभाने के लिए परिपक्व नहीं हुए हैं। इससे कुछ ही दिन पहले उनके ससुर को फिर से पार्टी से निकाला गया था। इस बार ट्विस्ट यह है कि इस बार मायावती के साथ बैठक में उनकी बगल की कुर्सी पर ईशान आनंद बैठे। यह कुर्सी आमतौर पर आकाश के लिए आरक्षित थी। वहां ईशान के बैठने के बाद इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि मायावती अपने दूसरे भतीजे को उत्तराधिकारी बनाने जा रही हैं। कहा जा रहा है कि आकाश अपने ससुर और ससुराल परिवार के कारण मायावती की नजरों से उतरे हैं। हालांकि इससे पहले वे कई बार नजरों में चढ़े और उतरे हैं। यह तीसरा मौका है, जब उनको किनारे किया गया है।

अब सवाल है कि आकाश के अंदर मायावती कैसी परिपक्वता देखना चाहती हैं? आकाश बहुत बढ़िया भाषण देते हैं, जनता के बीच उनकी उपस्थिति पार्टी नेताओं में जोश भरती है और युवा हैं। अगर रणनीति के स्तर पर कुछ गलती हो रही है तो मायावती को उसे ठीक करना चाहिए। यह करने की बजाय वे बार बार उनको  बनाती और हटाती हैं तो उसका कारण दूसरा है। अगर परिपक्वता की बात होती तो उस कसौटी पर कोई भी नेता शुरुआत ही नहीं कर सकता था। जब मायावती को कांशीराम ने राजनीति में उतारा और बड़ी भूमिकाएं दीं तब वे भी बहुत परिपक्व नहीं थीं। उनकी तो पारिवारिक पृष्ठभूमि भी वैसी नहीं थी, जैसी आकाश को मिली है। इसके अलावा अब बसपा या चंद्रशेखर की पार्टी के नेता यह सवाल भी उठाने लगे हैं कि अगर आकाश परिपक्व नहीं हैं तो क्यों नहीं मायावती परिवार से बाहर के किसी नेता को उत्तराधिकारी की तरह तैयार करती हैं? जैसे कांशीराम ने मायावती को तैयार किया वैसे ही मायावती किसी और को अपनी विरासत सौंपें! लेकिन यह नहीं करना है। विरासत परिवार में ही रहनी है। उसमें यह म्यूजिक चेयर का खेल चलता रहेगा। इस बीच छह महीने में चुनाव होने वाले हैं। अगर बसपा को मजबूती से चुनाव लड़ना है तो एकजुट होकर चुनाव की तैयारी करनी होगी। यह फैमिली सीरियल बंद करना होगा।

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