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अभिषेक के लिए मुश्किलें बढ़ गईं

पश्चिम बंगाल की फालता विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान में भाजपा के देवांशु पांडा ने बहुत बड़ी जीत हासिल की है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक लाख से ज्यादा वोट से जीत का दावा किया था और भाजपा उम्मीदवार की जीत वैसी ही बड़ी हुई है। चुनाव मैदान छोड़ कर हटे तृणमूल कांग्रेस के जहांगीर खान चौथे स्थान पर रहे और जमानत जब्त हो गई। यह सीट तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी के चुनाव क्षेत्र डायमंड हार्बर के तहत है। अभिषेक डायमंड हार्बर मॉडल की बात करते थे और दावा करते थे कि इस मॉडल को भाजपा दस जनम लेकर भी नहीं तोड़ पाएगी। लेकिन भाजपा ने अभी ही फालता सीट जीत कर इस मॉडल को ध्वस्त कर दिया।

वैसे तो विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद ही अभिषेक के खिलाफ आवाजें उठनी शुरू हो गई थीं। लेकिन फालता सीट से जहांगीर खान के भागने और इतनी बुरी तरह से हारने के बाद आवाजें तेज हो गई हैं। पार्टी के नेता मान रहे हैं कि ममता और अभिषेक दोनों ने लड़ना छोड़ दिया। कई नेता ऐसा चाहते थे कि जहांगीर के भागने के बाद लेफ्ट के शंभुनाथ कुर्मी को समर्थन दिया जाए। वे चाहते थे कि ममता कांग्रेस और लेफ्ट दोनों से बात करें और फालता सीट पर साझा लड़ाई लड़ी जाए। लेकिन ममता और उनके भतीजे ने लड़ाई छोड़ दी। इस वजह से पार्टी के अनेक नेता निराश हुए हैं। कई नेता पहले से ही पाला बदलने के लिए तैयार बैठे हैं। वे अभिषेक के खिलाफ बगावत करके पार्टी से अलग हो सकते हैं। जब से महिला सांसद काकोली घोष को केंद्र सरकार की ओर से वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली है तब से कई नेता उधर जाने की जुगाड़ में लगे हैं।

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