समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती दी। पिछले दिनों अखिलेश अयोध्या गए तो उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर हिम्मत है तो योगी आदित्यनाथ अयोध्या से लड़ कर दिखाएं। ध्यान रहे पिछले कुछ समय से यह चलन हो गया है कि जिन राज्यों में विधान परिषद है वहां मुख्यमंत्री आमतौर पर उसी के सदस्य होते हैं। बिहार में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री रहते विधान परिषद के ही सदस्य रहे। ऐसे ही योगी आदित्यनाथ भी विधानसभा का चुनाव नहीं लड़े हैं। वे विधान परिषद के सदस्य हैं। अखिलेश यादव भी जब मुख्यमंत्री थे तब विधान परिषद में ही थे।
अखिलेश ने सिर्फ एक बार विधानसभा का चुनाव लड़ा था, 2022 में कन्नौज सीट से। तब सपा को सरकार बनने की उम्मीद थी। लेकिन जब सरकार नहीं बनी तो अखिलेश ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। बिना मुख्यमंत्री बने सिर्फ विधायक या नेता विपक्ष रहना उनको अपने कद के अनुरूप नहीं लगा। इस बार पता नहीं वे विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे या नहीं। लेकिन योगी आदित्यनाथ को चुनाव लड़ने की चुनौती दी। जब योगी ने चुनौती स्वीकार कर ली और अखिलेश को अपने सामने आकर लड़ने को कहा कि अखिलेश पीछे हट गए। उन्होंने कहा कि कोई पीडीए प्रहरी ही योगी को हरा देगा। लेकिन अगर सचमुच अखिलेश चुनाव का माहौल बनाना चाहते हैं तो उन्हें योगी को लड़ने के लिए मजबूर करना चाहिए और खुद उनके सामने लड़ना चाहिए। अरविंद केजरीवाल ने ऐसा करके ही 2013 में शीला दीक्षित को हराया था। इस साल शुभेंदु अधिकारी भी ममता बनर्जी के गढ़ में जाकर लड़े थे।
