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पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों का क्या हुआ?

Howrah, Aug 16 (ANI): West Bengal Chief Minister Suvendu Adhikari addresses a press conference at Nabanna (State Secretariat), in Howrah on Sunday. (ANI Photo)

पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बने चार महीने होने वाले हैं और अब घुसपैठियों की चर्चा थम गई है। चुनाव से पहले जितना प्रचार था और चुनाव के बाद जिस तरह की धरपकड़ हो रही थी वह अब नहीं हो रही है। इस बीच एक रिपोर्ट आई है, जिसके मुताबिक पश्चिम बंगाल में न तो घुसपैठिए तलाशे जा रहे हैं, न उनको पकड़ा जा रहा है और न उनको देश से बाहर निकाला जा रहा है। जो होना था वह हो चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार के बनवाए डिटेंशन सेंटर में अब एक सौ से कुछ ज्यादा लोग हैं। उनको भी सीमा के पार नहीं भेजा जा रहा है। बताया जा रहा है कि तीन हजार के करीब लोग पकड़े गए थे, जिनमें से ज्यादातर को बाहर निकाल दिया गया। लेकिन यह काम सरकार बनने के पहले एक महीने में ही हो गया। इसी तरह पहले महीने ही इस बात का माहौल बनाया गया कि घुसपैठिए खुद भाग रहे हैं। अब वह भी थम गया है।

जानकार सूत्रों का कहना है कि भाजपा ने चुनाव में जितना दावा किया था उतने घुसपैठिए बंगाल में नहीं थे। दूसरे, अगर घुसपैठिए हैं भी तो उनकी पहचान करना और निकालना बहुत मुश्किल काम है। सीमावर्ती मुस्लिम बहुल जिलों में अब घुसपैठिए आबादी में इतने घुलमिल गए हैं कि उनको नहीं पहचाना जा सकता है। तभी कहा जा रहा है कि यह एक राजनीतिक दांव था, जिसका लाभ भाजपा ने ले लिया। वह सचमुच गंभीर होती तो पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड इन तीनों राज्यों में घुसपैठियों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाती और उन्हें निकालने का प्रयास करती। लेकिन अभी घुसपैठ वाले किसी भी राज्य में चुनाव नहीं है तो न उसकी चर्चा हो रही है और न उस पर काम हो रहा है। बंगाल में भी सब सेटल हो गया है। मवेशी और इंसानों की तस्करी कराने वाले बहुत सारे लोग अब किसी रास्ते से भाजपा के सहयोगी बन गए हैं या बनने का प्रयास कर रहे हैं।

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