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संसदीय समिति का क्या मतलब रह गया?

New Delhi, Feb 04 (ANI): Congress MP Digvijay Singh speaks in Rajya Sabha during the Budget Session of the Parliament, in New Delhi on Tuesday. (ANI Photo/Sansad TV)

यह चिंता पिछले कई सालों से जताई जा रही है कि संसदीय समितियों को धीरे धीरे कमजोर किया जा रहा है। अभी शिक्षा के क्षेत्र में जो गड़बड़ियां हुई हैं उनको लेकर शिक्षा मंत्रालय की संसदीय समिति के कामकाज में इसके संकेत मिले हैं। पता चला है कि सत्तारूढ़ दल यानी भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों के सांसद बहुमत का फायदा उठा कर प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं। समिति के अध्यक्ष कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह हैं लेकिन उनको अपने हिसाब से काम नहीं करने दिया जा रहा है। पहले भी कई और समितियों में ऐसा देखने को मिला है कि विपक्षी पार्टी का अध्यक्ष होने के बावजूद सत्तापक्ष के सांसदों ने उनको फैसला करने से रोक दिया।

गौरतल है कि शिक्षा मामलों की संसदीय समिति दो मामलों की जांच कर रही है। एक सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा में ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के कारण हुई गड़बड़ियों और दूसरी नीट यूजी की परीक्षा में पेपर लीक मामले की। सीबीएसई के मामले में तो पहली बार ऐसा हुआ कि 12वीं की परीक्षा देने वाले छात्र को भी प्रेजेंटेशन के लिए बुलाया गया। लेकिन नीट यूजी के पेपर लीक मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाले डॉक्टरों के संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ डॉक्टर्स को समिति के सामने नहीं पेश होने दिया गया। समिति के चेयरमैन चाहते थे कि डॉक्टरों के संगठन के प्रतिनिधि को बुलाया जाए और उनकी बात सुनी जाए। लेकिन भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों के सांसदों ने इसे रोक दिया।

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