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महाराष्ट्र में क्या करेगी कांग्रेस?

Delhi election congress

महाराष्ट्र में कांग्रेस के सामने सांप छुछुंदर वाली स्थिति हो गई। उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस से सलाह मशविरा किए बगैर राज ठाकरे के साथ तालमेल कर लिया। दोनों भाई एक हो गए। मराठी अस्मिता के नाम पर दोनों ने एक साथ रैली की और अब दोनों के कार्यकर्ता साथ साथ सड़कों पर उतरे हैं। कांग्रेस के दूसरे सहयोगी शरद पवार को इससे कोई समस्या नहीं है, बल्कि कहा जा रहा है कि वे इस तालमेल के आर्किटेक्ट हैं। उन्होंने ठाकरे बंधुओं की नजदीकी बनवाई है और इसका मकसद एकनाथ शिंदे को कमजोर करके भाजपा में उनकी स्थिति खराब करना है। अगर वे कमजोर हुए तो फिर ठाकरे बंधुओं की एकजुट पार्टी फिर भाजपा के साथ जा सकती है। यानी महाराष्ट्र की राजनीति पुरानी नॉर्मल स्थिति में लौट सकती है। लेकिन इससे कांग्रेस पार्टी की चिंता बढ़ी है।

कांग्रेस को समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करे? बिहार में विधानसभा का चुनाव है और हिंदी भाषी लोगों पर हमले के बाद कांग्रेस पर सवाल उठने लगे हैं। उधर महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव आने वाले हैं, जिसमें यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि गठबंधन रहेगा या नहीं। कांग्रेस के नेता अकेले लड़ने की बात कर रहे हैं क्योंकि कांग्रेस के लिए राज ठाकरे के साथ जाना संभव नहीं है। भाषा और धर्म को लेकर उनकी राजनीति देश के दूसरे हिस्सों में कांग्रेस का बड़ा नुकसान कर सकती है। कांग्रेस की स्थिति अब माया मिली न राम वाली हो गई है। उद्धव ठाकरे के साथ जाकर उसने एक समझौता किया था और मुस्लिम मतदाताओं को भरोसा दिलाया था कि सब ठीक है। लेकिन अब उद्धव भी राज ठाकरे जैसी राजनीति करने लगे हैं तो कांग्रेस के सामने साख का संकट भी खड़ा हो गया है। मुंबई में शरद पवार की पार्टी का ज्यादा असर नहीं है। सो, बीएमसी का चुनाव कांग्रेस को अकेले ही लड़ना होगा।

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