देश के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी के छोटे भाई और एक समय सरकार के चहेते कारोबारी रहे अनिल अंबानी की मुश्किलें बढ़ रही हैं। लेकिन इतनी मुश्किलें बढ़ने के बाद यह भी सवाल है कि उनको इतनी राहतें क्यों मिल रही हैं? उनके खिलाफ जितने मामले आए हैं या जितने आरोप लगे हैं और जिस तरह की कार्रवाई की खबरें आ रही हैं उसे देखते हुए उनकी गिरफ्तारी बहुत पहले हो जानी चाहिए थी। ऐसे मामलों में आमतौर पर केंद्रीय एजेंसियां गिरफ्तारी पहले करती हैं और बाकी कार्रवाई उसके बाद होती है। लेकिन यहां सारी कार्रवाई हो रही है, गिरफ्तारी छोड़ कर।
खबर है कि ईडी ने अनिल अंबानी समूह की कंपनियों के तीन हजार करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की जा रही है। इससे पहले खबर आई थी कि उनके बेटे जय अनमोल के ऊपर भी वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। उससे पहले खबर आई थी कि देश के दो बड़े बैंकों ने अनिल अंबानी की कंपनी के अकाउंट को फ्रॉड घोषित किया है। उनके ऊपर 17 हजार करोड़ रुपए के आर्थिक गड़बड़ी के आरोप लग रहे हैं। लेकिन उनसे टुकड़ों टुकड़ों में पूछताछ हो रही है। तभी सवाल है कि आगे क्या होगा? इसी तरह मंथर गति से मामला चलता रहेगा या सचमुच कोई कार्रवाई होगी? क्या किसी खास अवसर का इंतजार किया जा रहा है?
