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पेगासस मामले में आगे क्या होगा?

Pegasus case

इजराइल की कंपनी एनएसओ के बनाए पेगासस सॉफ्टवेयर से जासूसी का मामला भारत में लोग भूल चुके होंगे। भारत में अक्सर ऐसा होता है। यहां अदालती मामला भी कहीं पहुंचा और सरकार ने तो जांच नहीं ही कराई। मीडिया और विपक्षी पार्टियों ने भी इसे छोड़ कर दूसरा मुद्दा पकड़ लिया। लेकिन अमेरिका में ऐसा नहीं हुआ। अमेरिका में व्हाट्सऐप ने इसे लेकर मुकदमा किया था। उसने कहा था कि पेगासस के जरिए उसके सॉफ्टवेयर को हैक किया गया, निजता के अधिकारों और उसकी सेवा शर्तों का उल्लंघन हुआ है। व्हाट्सऐप ने दावा किया था कि 14 सौ फोन हैक किए गए। अब अमेरिकी अदालत ने व्हाट्सऐप के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने माना है कि पेगासस के इस्तेमाल से हैकिंग की गई थी।

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व्हाट्सऐप के दावे के मुताबिक जिन 14 सौ फोन की हैकिंग की गई थी, उनमें से तीन सौ फोन भारत के थे। इसमें दो केंद्रीय मंत्रियों के फोन शामिल हैं तो तीन विपक्षी नेताओं, संवैधानिक पद पर बैठे दो लोगों, कई जजों और पत्रकारों के नाम हैं। कुछ कारोबारी भी इसमें शामिल हैं, जिनके फोन हैक किए गए। उस समय भारत सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। दूसरी ओर इजराइली कंपनी ने साफ कर दिया था कि वह निजी लोगों को ये सॉफ्टवेयर नहीं बेचती है। सरकारें या सरकारी एजेंसियां ही इन्हें खरीद सकती हैं। अमेरिकी अदालत में इजराइली कंपनी एनएसओ की हार और व्हाट्सऐप की जीत से यह सवाल उठता है कि क्या भारत में भी अब यह मामला फिर से खुलेगा? मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने अमेरिकी अदालत के फैसले के बाद यह मुद्दा उठाया है।

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