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भाजपा विदा हुए अध्यक्षों का क्या करेगी?

New Delhi, Mar 18 (ANI): Prime Minister Narendra Modi, Home Minister Amit Shah, BJP National President Nitin Nabin, Maharashtra CM Devendra Fadnavis, West Bengal Assembly LoP Suvendu Adhikari and others at the Central Election Committee meeting of the BJP for West Bengal at the BJP headquarters, in New Delhi on Wednesday. (ANI Video Grab)

यह लाख टके का सवा है कि भारतीय जनता पार्टी ने जिन चार प्रदेश अध्यक्षों को बदला है उनका क्या करेगी? यह सवाल इसलिए ज्यादा दिलचस्प है क्योंकि कई प्रदेश अध्यक्ष तो ऐसे ही बदल गए। यानी बिना कुछ पाए ही पद से विदा हो गए। न सांसद बन पाए, न विधायक और न मंत्री पद मिला। अब हटने के बाद यह भी पता नहीं है कि आगे उनका क्या होगा। इसमें सबसे ज्यादा चर्चा का मामला पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष से सुनील जाखड़ की विदाई का है। सुनील जाखड़ पंजाब कांग्रेस के बड़े नेता थे। उनके पिता स्वर्गीय बलराम जाखड़ लोकसभा अध्यक्ष रहे थे। जिस समय कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस छोड़ी उसी समय जाखड़ भी उनके साथ कांग्रेस से अलग हुए और भाजपा में चले गए। भाजपा ने उनको प्रदेश अध्यक्ष बनाया। लेकिन इसके बाद उनको कुछ नहीं मिला। उनसे बाद में कांग्रेस छोड़ने वाले रवनीत सिंह बिट्टू लोकसभा का चुनाव भाजपा से लड़े और हारने के बाद भी मंत्री बन गए। उनको राजस्थान से राज्यसभा में लाया गया। लेकिन जाखड़ को कुछ नहीं मिला। अब वे प्रदेश अध्यक्ष से हट गए हैं तो उनके लिए आगे का रास्ता और मुश्किल दिख रहा है। जाखड़ की जगह केवल सिंह ढिल्लों को अध्यक्ष बनाया गया है। वे भी कैप्टेन अमरिंदर सिंह के करीबी बताए जाते हैं।

इसी तरह का मामला दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए गए वीरेंद्र सचदेवा का है। पंजाबी चेहरे के तौर पर उनको प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सचदेवा की बड़ी उपलब्धि यह रही कि उनकी कमान में हुए चुनाव में भाजपा 27 साल के बाद दिल्ली की सत्ता में लौटी। लेकिन उनको इसका कोई लाभ नहीं मिला। पंजाबी कोटे से पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से हर्ष मल्होत्रा चुनाव लड़े और जीत कर केंद्र में मंत्री बने। अब उनको ही सचदेवा की जगह दिल्ली प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया है। सो, ऐसा लग रहा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल से उनकी विदाई होगी। लेकिन वे मंत्री रह लिए, सांसद रहेंगे और प्रदेश की जिम्मेदारी संभालेंगे। सवाल है कि वीरेंद्र सचदेवा का क्या होगा? अभी तो न लोकसभा चुनाव है और न विधानसभा का चुनाव है। कुछ लोग कह रहे हैं कि उनको राष्ट्रीय संगठन में कोई पद मिल सकता है। लेकिन असली बात तो सांसद या विधायक बनने की होती है।

हरियाणा में इसी तरह भाजपा ने मोहन लाल बडोली को विदा कर दिया। उनकी जगह डॉक्टर अर्चना गुप्ता को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। बडोली प्रदेश अध्यक्ष थे और उनके नाम पर भाजपा को ब्राह्मणों का समर्थन मिला। भाजपा ने वैसे तो पिछड़ी जाति और पंजाबी का समीकरण बनाया था। मनोहर लाल खट्टर की जगह पिछड़े समाज के नायब सिंह सैनी को सीएम बना कर भाजपा चुनाव लड़ी थी। लेकिन जब तक उसमें ब्राह्मण का एकमुश्त वोट नहीं जुड़ता तब तक भाजपा नहीं जीत सकती थी। तभी बडोली को अध्यक्ष बनाना उसके काम आय़ा। लेकिन बदले में बडोली को कुछ नहीं मिला। ब्राह्मण कोटे से राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रेखा शर्मा राज्यसभा चली गईं। अब बडोली की अध्यक्ष पद से भी विदाई हो गई है। भाजपा ने त्रिपुरा में भी प्रदेश अध्यक्ष बदला है। वहां दो साल के बाद विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं।

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