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नितिन नबीन की टीम कब बनेगी

नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद कहा जा रहा था कि दो चार दिन में ही उनकी टीम की घोषणा हो जाएगी। ऐसा इसलिए कहा जा रहा था क्योंकि सूत्रों के हवाले से ऐसी खबर पार्टी की ओर से दी गई थी कि अध्यक्ष के चुनाव में बहुत देरी हुई है तो उनकी टीम बनाने में देरी नहीं की जाएगी। यह भी कहा जा रहा था कि पहले से ही टीम की तैयारी भी हो चुकी है। यानी ऐसे चेहरे छांटे जा चुके हैं, जिनको नितिन नबीन की टीम में जिम्मेदारी मिलेगी। ध्यान रहे उनको 14 दिसंबर को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। तभी से उनकी टीम के चेहरों को लेकर कयास लग रहे थे। फिर जब 20 जनवरी को वे औपचारिक रूप से पार्टी के अध्यक्ष चुने गए उसके बाद टीम की घोषणा चंद दिनों की बात मानी जा रही थी। लेकिन करीब 20 दिन बीत जाने के बाद भी टीम की घोषणा नहीं हुई है।

उन्होंने विधानसभा चुनाव और कई राज्यों में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों के लिए जिन नेताओं को नियुक्त किया उनके नई टीम में शामिल होने की चर्चा है। जैसे विनोद तावड़े को केरल भेजा गया। माना जा रहा है कि वे महामंत्री बने रहेंगे। ऐसे ही तरुण चुघ को मणिपुर विधायक दल के नेता के चुनाव में पर्यवेक्षक बनाया गया। पहले कहा जा रहा था कि उनको महामंत्री पद से हटाया जा सकता है। लेकिन अब चर्चा है कि वे भी रहेंगे। सुनील बंसल का महामंत्री बने रहना भी पक्का माना जा रहा है और ग्रेटर बेंगलुरू महानगरपालिका चुनाव के लिए भेजे गए राम माधव की महामंत्री के तौर पर वापसी की चर्चा है। लेकिन क्या नई टीम की घोषणा अभी हो जाएगी या मई तक इंतजार करना होगा, यह बड़ा सवाल है। जानकार सूत्रों का कहना है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले शायद ही नितिन नबीन की नई टीम की घोषणा हो। इस बात को नरेंद्र मोदी की तीसरी सरकार के दो साल पूरे होने से भी जोड़ा जा रहा है। ध्यान रहे जून में मोदी सरकार के दो साल पूरे होंगे। उस समय सरकार में फेरबदल की चर्चा भी है और उससे पहले संगठन को भी नया रूप दिया जाएगा।

जानकार सूत्रों का कहना है कि नितिन नबीन की टीम में ऊपर बताए गए कुछ अनुभवी और पुराने नेताओं के साथ साथ नए चेहरों को भी जगह दी जाएगी। बताया जा रहा है कि नए चेहरों में क्षेत्रीय संतुलन बनाने पर भी ध्यान है। इसमें उत्तर प्रदेश चुनाव पर भी खास नजर रहेगी। जानकार सूत्रों का कहना है कि अगर सुधांशु त्रिवेदी केंद्र में मंत्री नहीं बनते हैं तो संगठन में महामंत्री बनेंगे। तमिलनाडु के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे के अन्नामलाई को राष्ट्रीय टीम में जगह देने की चर्चा है। हालांकि उन्होंने तमिलनाडु के चुनाव से अपने को दूर करके अपना नुकसान किया है। दक्षिण भारत से वनाथी श्रीनिवास और सीटी रवि के नाम की भी चर्चा है। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री रहे बिप्लब देव को महामंत्री बनाया जा सकता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के नाम की भी चर्चा है। पार्टी के सात महामंत्रियों में से कम से कम चार चेहरे बिल्कुल नए होंगे। अलग अलग राज्यों से युवा चेहरों की पहचान की जा रही है, जिनको सचिव बनाया जा सकता है। कई चेहरे ऐसे होंगे, जो इस समय राज्यों के चुनाव में काम कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष को उम्र और अनुभव को देखते हुए उसी के आसपास की उम्र और अनुभव के लोगों को उनकी टीम में रखा जाएगा। अगले साल होने वाले सात राज्यों के चुनाव के लिहाज से भी संतुलन बनाया जाएगा।

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