आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राधव चड्ढा को पार्टी ने राज्यसभा में उप नेता पद से हटा दिया है। इसका पहला असर तो यह होगा कि अब उच्च सदन में भाषण देने के लिए राघव चड्ढा को उतना समय नहीं मिल पाएगा, जितना पहले मिलता था। ध्यान रहे राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 10 सांसद हैं। वह सबसे ज्यादा सांसद वाली टॉप पांच पार्टियों में है। इसलिए उसके उप नेता को अच्छा खासा समय मिलता था। राघव चड्ढा इस समय का इस्तेमाल आम लोगों से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए करते थे। उन्होंने हवाईअड्डों पर महंगे समोसे से लेकर उड़ान में देरी होने पर कोई जवाबदेही तय नहीं होने का मुद्दा उठाया तो 12 महीने में 13 बार फोन रिचार्ज का मुद्दा उठाया, नेट डाटा रोलओवर का मुद्दा उठाया, स्कूलों की फीस पर बात की। लेकिन आम आदमी पार्टी का मानना है कि यह सब सॉफ्ट पीआर है।
असल में राघव चड्ढा पिछले काफी समय से अपनी पार्टी से दूर हो गए थे। प्रियंका चोपड़ा की बहन परिणति चोपड़ा से शादी करने के बाद यह दूरी बढ़ी। सवाल है कि क्या वे भाजपा के लिए काम कर रहे हैं? आप का कहना है कि वे भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल नहीं उठाते हैं। यह भी कहा गया है कि वे डरते हैं। दूसरी ओर यह थीसिस भी चल रही है कि जिस तरह से कुछ ताकतों ने मिल कर अरविंद केजरीवाल को खड़ा किया उसी तरह से अब राघव चड्ढा को खड़ा किया जा रहा है। उनको एक स्वतंत्र आवाज के तौर पर मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। आगे के चुनाव में दिल्ली में उनका इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि अगर ऐसा होगा तब भी भाजपा को ही इसका लाभ मिलेगा। राजनीतिक कारणों के अलावा एक बड़ा कारण यह भी है कि अरविंद केजरीवाल बहुत कॉम्पलेक्स में रहते हैं और असुरक्षा बोध से भरे रहते हैं। तभी राघव चड्ढा की लोकप्रियता से वे परेशान हुए होंगे।
