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मोहन यादव किसके निशाने पर?

Bhopal, Oct 03 (ANI): Madhya Pradesh Chief Minister Mohan Yadav virtually interacts with the flood and yellow mosaic-affected farmers and transfer a relief amount of more than ₹653.34 crore to the affected farmers of 13 districts through a single click, in Bhopal on Friday. (@DrMohanYadav51 X/ANI Photo)

मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द हुआ तो नैरेटिव को भटकाने के लिए भाजपा और उसके इकोसिस्टम के लोगों ने कहना शुरू किया कि कांग्रेस के अंदर के लोगों ने ही भितरघात की है, जिससे मीनाक्षी का परचा रद्द हुआ। हालांकि इससे बकवास कोई बात नहीं हो सकती है। हो सकता है कि कांग्रेस के किसी नेता ने मीनाक्षी के खिलाफ कोर्ट में हुई शिकायत के बारे में जानकारी दी हो लेकिन वह मामला ऐसा नहीं था, जिस पर नामांकन रद्द हो जाए। इसलिए कांग्रेस के भितरघात का हवाला देकर चुनाव अधिकारी के नियम विरूद्ध काम को कवर किया गया। लेकिन अब तो कांग्रेस के नेता पूछ रहे हैं कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ किसने भितरघात किया? असल में मोहन यादव और उनके परिवार की सैकड़ों एकड़ जमीन का जो मामला आया है उसके पीछे भाजपा की अंदरूनी राजनीति देखी जा रही है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इसी ओर इशारा किया। हालांकि उनको अपना जाति प्रेम भी प्रकट करना था। तभी उन्होंने ट्विस्ट दिया कि भाजपा को मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्री को हटाना है और ऐसा इसलिए करना है ताकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को हटाया जा सके। उनके हिसाब से इसलिए मोहन यादव के खिलाफ मामले खुले हैं। वैसे हैरानी तो है कि मामला सामने आया और एक ऐसे अखबार ने उसे छाप भी दिया, जो हर बड़े मामले में भाजपा को कवर देता रहता है। भाजपा के एक पूर्व मुख्यमंत्री से लेकर इंदौर के एक विधायक तक के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने सारा ब्योरा दिया। हालांकि यह ब्योरा कई पत्रकारों के पास कई महीनों से था। असली सवाल यह है कि किसके इशारे पर यह सब हुआ है और इसकी अंत परिणति क्या होगी? अगर मोहन यादव हटाए गए तो भाजपा के इस सिद्धांत का क्या होगा कि यहां इस्तीफे नहीं होते?

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