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राज्यसभा में कौन बनेगा उप सभापति?

यह लाख टके का सवाल है, जिस पर संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू होते ही मंथन शुरू हो गया है। पता नहीं जिन दो लोगों को फैसला करना है वे इस पर विचार कर रहे हैं या नहीं लेकिन संसद परिसर में और पार्टियों के नेताओं व पत्रकारों की अनौपचारिक चर्चाओं में इस पर विचार हो रही है कि राज्यसभा का उप सभापति कौन बनेगा। सारी चर्चाएं इस बात पर समाप्त हो रही हैं कि जो होगा वह नरेंद्र मोदी और अमित शाह तय करेंगे। लेकिन इसके बाद फिर एक सवाल और खड़ा हो जा रहा है कि क्या उप सभापति का चुनाव होगा या वहां भी लोकसभा की तरह स्थायी रूप से वैकेंसी रखी जाएगी? ध्यान रहे 18वीं लोकसभा के दो साल होने जा रहा है लेकिन अभी तक सरकार ने उपाध्यक्ष की नियुक्ति का कोई प्रयास नहीं किया है और न कोई पहल की है। ध्यान रहे 17वीं लोकसभा में लोकसभा उपाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई थी। इस तरह पिछले सात साल से उपाध्यक्ष का पद खाली है। सो, अगर राज्यसभा में उप सभापति का पद भी दो चार साल खाली रह जाए तो कोई आफत नहीं आएगी। वैसे भी राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन सभापति की जिम्मेदारी अच्छे से निभा रहे हैं। वे काफी समय तक सदन में बैठते हैं।

बहरहाल, पहले यह समझें कि उप सभापति बनाने की जरुरत क्यों पड़ने वाली है? पिछले कई बरसों से उप सभापति की भूमिका निभा रहे जनता दल यू के हरिवंश नारायण सिंह रिटायर हो रहे हैं। उनका राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और जनता दल यू ने उनको फिर से राज्यसभा नहीं भेजने का फैसला किया है। पहले कहा जा रहा था कि भाजपा चाहती है कि वे तीसरी बार राज्यसभा आएं। लेकिन नीतीश कुमार की पार्टी ने यह फैसला नहीं किया और भाजपा ने भी हरिवंश को उनके हाल पर छोड़ दिया, जैसे पहले जदयू के आरसीपी सिंह के साथ किया था। वे नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री थे और भाजपा के बहुत करीब हो गए। लेकिन जब नीतीश कुमार ने उनको राज्यसभा नहीं दिया तो भाजपा ने भी उनको कोई महत्व नहीं दिया।

सो, अब नया उप सभापति बनाना होगा। तभी यह यक्ष प्रश्न खड़ा हुआ कि कौन बनेगा उप सभापति? कायदे से जनता दल यू के कोटे से ही किसी को उप सभापति बनाया जा सकता है। जदयू कोटे के राज्यसभा सांसदों में रामनाथ ठाकुर केंद्र सरकार में मंत्री हैं। वे अति पिछड़ा समाज से आते हैं और कर्पूरी ठाकुर के बेटे हैं। एक सदस्य खुद नीतीश कुमार होंगे तो उनके राजनीतिक कद और मानसिक अवस्था को देखते हुए संभव नहीं है कि उन्हें यह पद दिया जाए। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा उप सभापति नहीं बनना चाहते हैं और खीरू महतो को नहीं बनाया जाएगा। सो, जनता दल यू से शायद कोई भी सदस्य उप सभापति नहीं बने। यह तय है कि परंपरा के मुताबिक पद विपक्ष को नहीं दिया जाएगा। किसी सहयोगी पार्टी को ही यह पद मिलेगा। तो क्या चंद्रबाबू नायडू की पार्टी को यह पद मिल सकता है या एकनाथ शिंदे और अजित पवार की पार्टी से किसी को मौका मिलेगा? पहले सरकार ने तटस्थ रहने और मुद्दों पर आधारित समर्थन भाजपा को देने वाली पार्टियों जैसे बीजद या वाईएसआर कांग्रेस को यह पद ऑफर किया था। अब वह भी संभव नहीं है। बीजद से सीधी लड़ाई है तो वाईएसआर कांग्रेस को इसलिए नहीं दे सकते हैं क्योंकि नायडू नाराज हो जाएंगे।  सो, इस चालू सत्र के बाद उप सभापति का मामला भी उलझने वाला है।

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