यह ऐसा सवाल है, जिसका स्वंय अखिलेश यादव भी बहुत तार्किक और विश्वास करनेलायक जवाब नहीं दे सके। उनसे जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि एक नई पीढ़ी के नेता को वे आगे ला रहे हैं। सवाल है क्या रामगोपाल यादव और शिवपाल यादव के बेटों को संसद में भेजने से नई पीढ़ी के नेता वाली जरुरत नहीं पूरी हुई है? उन्होंने यह भी कहा कि सभी पार्टियां उद्योग समूहों को जोड़ती हैं। तो क्या उत्तर प्रदेश के किसी उद्योग समूह का कोई व्यक्ति नहीं था, जिसे राज्यसभा भेजा जा सके? रिलायंस समूह के साथ काम करने वाले धनराज परिमल नाथवानी को ही क्यों भेजा? किसी दूसरे उद्योग समूह का व्यक्ति क्यों नहीं?
ध्यान रहे अनिल अंबानी सपा के समर्थन से राज्यसभा जा चुके हैं। उस समय मुकेश और अनिल अंबानी का बंटवारा नहीं हुआ था। तो क्या पुराने संबंधों के कारण भेजा गया है? सोशल मीडिया में सैकड़ों करोड़ रुपए के चंदे की बात हो रही है। लेकिन वह भी पुख्ता कारण नहीं है। कम ही लोग असल में जानते होंगे कि धनराज का चुनाव किस आधार पर हुआ। पर यह स्पष्ट दिख रहा है कि यह स्वाभाविक पसंद नहीं है। क्या किसी दबाव में यह फैसला हुआ? हो सकता है। कांग्रेस का एंगल देखने की जरुरत नहीं है। इसमें भाजपा का एंगल है। अखिलेश यादव को इस समय इम्युनिटी है कि प्रदेश में कोई तीसरा विकल्प नहीं है। बसपा के बारे में भी यह धारणा है कि वह भाजपा से मिली है और इस फैसले के बाद सपा के बारे में भी यही धारणा है। फिर भी मुस्लिम वोट देगा क्योंकि उसके सामने विकल्प नहीं है। हां, राहुल अगर ऐलान कर दें कि सपा ने भाजपा से हाथ मिला लिया है इसलिए वे तालमेल नहीं करेंगे और अकेले लड़ेंगे तब चुनाव बहुत दिलचस्प हो जाएगा।
