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भागवत क्यों दूरी दिखा रहे भाजपा से

Ayodhya, Nov 25 (ANI): Prime Minister Narendra Modi, Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath and Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) Chief Mohan Bhagwat during the Dhwajarohan Utsav at Shri Ram Janmabhoomi Mandir, in Ayodhya on Tuesday. (@myogiadityanath X/ ANI Photo)

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ यानी आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर संघ और भाजपा की दूरी बताई है। यह हैरानी की बात है कि बिना किसी संदर्भ के अचानक उन्होंने कहना शुरू किया है कि भाजपा के नजरिए से आरएसएस को देखने की जरुरत नहीं है। यह बात पिछले दिनों उन्होने कोलकाता में कही थी, जहां वे संघ के एक सौ साल पूरे होने के मौके पर चल रहे व्याख्यान की शृंखला में भाषण देने गए थे। अब दो हफ्ते के भीतर उन्होंने फिर कहा है कि भाजपा के नजरिए से संघ को देखने की जरुरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा या विश्व हिंदू परिषद या दूसरे संगठन जो हैं उनके काम करने का तरीका अपना अपना है लेकिन संघ तो सिर्फ राष्ट्र निर्माण का काम करता है और लोगों को जोड़ने का काम करता है। एक तरह से उन्होंने विश्व हिंदू परिषद से भी संघ की दूरी दिखाई।

सवाल है कि ऐसा क्यों है? क्या संघ प्रमुख किसी वजह से नाराज हैं? उनके इस तरह के बयान भाजपा के नए कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन की नियुक्ति के बाद आने शुरू हुए हैं। तभी कहा जा रहा है कि उनकी नाराजगी इस वजह से हो सकती है। जानकार सूत्रों का कहना है कि संघ की ओर से जिन नामों की संभावना पर विचार किया जा रहा था कि उसमें नितिन नबीन का नाम नहीं था। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा की केंद्र सरकार की कई नीतियों या राज्यों के कामकाज से संघ के लोग खुश नहीं हैं। उनको यह फीडबैक है कि व्यापक रूप से हिंदू समाज में अब पहले जैसा उत्साह का भाव नहीं है। उनको लग रहा है कि भाजपा भी दूसरी पार्टियों की तरह काम कर रही है। इसलिए हो सकता है कि संघ को इस तरह के बयान देने की मजबूरी हुई हो। विश्व हिंदू परिषद और कुछ दूसरे संगठनों की ओर से हिंसा और मारपीट या मोरल पुलिसिंग जैसे कामों से भी आरएसएस को अलग दिखाने के लिए ऐसा बयान दिया गया हो सकता है।

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