अभिजीत दिपके और उनके नजदीकी लोग जैसे आशुतोष रांका और सौरव दास दावा कर रहे हैं कि अभी राजनीतिक पार्टी बनाने का कोई इरादा नहीं है और न चुनाव लड़ना है। लेकिन असल में दिपके और उनकी टीम राजनीतिक दल बनाएंगे। ध्यान रहे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के समय इंडिया अगेंस्ट करप्शन के लोग खास कर अरविंद केजरीवाल और उनके साथ दावा करते थे कि उनका कोई राजनीतिक मकसद नहीं है और वे चुनाव नहीं लड़ेंगे। लेकिन 2011 का आंदोलन समाप्त होने के एक साल के अंदर उन्होंने पार्टी बना ली थी और 2013 के दिसंबर में हुआ दिल्ली विधानसभा का चुनाव लड़ा, जिसमें उनकी पार्टी 70 में से 28 सीटें पर जीती थी। ऐसे ही अभिजीत दिपके अपनी टीम के साथ पार्टी बना कर राजनीति में उतरेंगे।
असली सवाल यह है कि उनकी टीम किसी राज्य को फोकस करेगी या सीधे 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी होगी? ‘जय भीम’ के नारे के साथ आंदोलन करने वाले दिपके उत्तर प्रदेश को चुन सकते हैं। अगर पार्टी बना कर वे उत्तर प्रदेश में लड़ने उतरते हैं तो युवाओं का पता नहीं उनको कितना समर्थन मिलेगा लेकिन मायावती की पार्टी बसपा के वोट में सेंध लगाने वाली एक और ताकत खड़ी हो जाएगी। दूसरा प्रदेश महाराष्ट्र हो सकता है, जहां वे राजनीति करें। उन पर नजर रखने की जरुरत है। वैसे अभी तो यही कहा जा रहा है कि देश भर में युवाओं के मुद्दों पर कॉकरोच जनता पार्टी नजर रखेगी और जरुरत पड़ने पर उनके समर्थन में आंदोलन करेगी। यह न तो किसी राजनीतिक दल का फॉर्मेट है और न एनजीओ को। ध्यान रहे युवाओं को नशा छुड़ाने में मदद करने के लिए बनी संस्था वारिस पंजाब दे की अंत परिणति भी चुनाव लड़ने और राजनीतिक दल बनाने में हुई है। इसलिए कॉकरोच जनता पार्टी भी अपवाद नहीं साबित होने वाली है।
