किर्गिज रिपब्लिक की राजधानी बिश्केक में हो रहे शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ की बैठक में कायदे से तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से हाथ मिलाना चाहिए, क्योंकि यह कूटनीति का तकाजा है। फिर भी यह सवाल उठ रहा है तो उसका कारण यह है कि भारत की क्रिकेट टीम के खिलाड़ी पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिला रहे हैं। जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों के धर्म पूछ कर उनकी हत्या किए जाने के बाद से भारतीय खिलाड़ी औपचारिक हैंडशेक नहीं कर रहे हैं।
अब प्रधानमंत्री मोदी का बिश्केक में शहबाज शरीफ से आमना सामना होगा। खास बात यह भी है कि एससीओ की अध्यक्षता पाकिस्तान को सौंपी जा रही है। अगले साल पाकिस्तान में एससीओ की बैठक होगी। सो, यह देखने वाली बात होगी कि मोदी शहबाज शरीफ से हाथ मिला कर उनको बधाई देते हैं या नहीं और अपने भाषण में इस बात का कोई संकेत देते हैं कि नहीं कि अगली बैठक में वे पाकिस्तान जाएंगे या नहीं। अगर मोदी हाथ मिलाते हैं और बधाई देते हैं तो फिर यह सवाल उठेगा कि क्या देशभक्ति के जिस रूप का प्रदर्शन भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी कर रहे थे वह सिर्फ उन्हीं के लिए है? देश के नेताओं या सरकार के अधिकारियों को ऐसा कुछ नही करना है?
