यह लाख टके का सवाल है कि क्या सचिन पायलट को पंजाब में कामयाबी मिलेगी? ध्यान पहे 2018 में जब राजस्थान के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जीती थी तब सचिन पायलट प्रदेश अध्यक्ष थे और सब मानते हैं कि उन्होंने बड़ी मेहनत की थी। हालांकि वे मुख्यमंत्री नहीं बन पाए थे। उसके बाद कुछ विवादों की वजह से वे राजनीति में थोड़ा बैकफुट पर रहे। कुछ समय पहले राष्ट्रीय संगठन में आए हैं तो उसके बाद उनकी पहली बड़ी परीक्षा पंजाब में होने वाली है। वहां के प्रभारी भूपेश बघेल को हटा कर असम भेजा गया है। माना जा रहा है कि बघेल की जोर जबरदस्ती वाली राजनीति के चलते राज्य में कांग्रेस की गुटबाजी और बढ़ गई थी।
बहरहाल, पायलट के प्रभारी बनने के बाद संयोग ऐसा रहा कि कांग्रेस को एक बड़ा मुद्दा मिल गया। एक किसान गुमनाम सिंह ने पिछले दिनों यह कहते हुए खुदकुशी कर ली कि उसका बेटा नशे की गिरफ्त में है और उसने राज्य सरकार के मंत्री हरपाल सिंह चीमा से इसकी शिकायत की तो उसे प्रताड़ित और अपमानित किया गया। एक दलित व्यक्ति की खुदकुशी के इस मामले को लेकर पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस ने एक बड़ा प्रदर्शन किया। कई महीनों के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि आपस में लड़ रहे दोनों खेमों के नेता यानी प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग और चुनाव अभियान समिति के प्रमुख चरणजीत सिंह चन्नी एक मंच पर है। दोनों ने एक साथ भाषण दिया, एक दूसरे की तारीफ की और समर्थकों को काबू में रखा। पायलट कह चुके हैं कि कोई मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं होगा और राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी चुनाव लड़ेगी। अगर वे पार्टी को एकजुट करने में कामयाब होते हैं तो कांग्रेस मजबूती से चुनाव लड़ पाएगी
