उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस बात की चिंता है कि राज्य में करीब एक लाख 30 हजार हिंदुओं के वोट कट गए। कायदे से तो संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को, जिसने संविधान की शपथ ली है, उसे जाति, धर्म, लिंग या नस्ल आदि के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए। मुख्यमंत्री को जितने भी वोट कटे हैं, उन सबकी चिंता करनी चाहिए। लेकिन जब योगी आदित्यनाथ 80 और 20 का चुनाव बताते हैं और मुस्लिमों को अलग थलग करने का खुलेआम ऐलान करते हैं तो उनसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती है कि वे मुस्लिम वोट कटने से चिंतित होंगे।
बहरहाल, मुख्यमंत्री की एक लाख 30 हिंदुओं के वोट कटने की चिंता से यह भी पता चलता है कि किस तरह से चुनाव आयोग ने मनमाने तरीके से काम किया है। इसमें भी योगी आदित्यनाथ की चिंता इस बात को लेकर ज्यादा है कि 55 लाख ऐसे लोगों के नाम कटे हैं, जो सरकारी योजनाओं के लाभार्थी हैं। जाहिर है कि वे इनकी बात कर रहे हैं लेकिन ज्यादा चिंता उन 75 लाख लोगों के नाम को लेकर होगी, जो लाभार्थी नहीं हैं। जो लाभार्थी नहीं है वह मध्य वर्ग का होगा और संभव है कि भाजपा का कोर वोटर हो। तभी मुख्यमंत्री ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को कटे हुए नाम जुड़वाने के लिए दिन रात मेहनत करने को कहा है। वैसे भी पहले से कहा जा रहा था कि लखनऊ से लेकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों के नाम कटे हैं, जो भाजपा के समर्थक मतदाता हो सकते हैं।
