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तेल कंपनियों और सरकारों की कमाई

भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम कई महीनों से स्थिर हैं। पिछले साल मार्च में आए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद एक महीने तक दाम बढ़े थे लेकिन उसके बाद से दाम स्थिर हैं। उनमें न बढ़ोतरी हो रही है और न कमी हो रही है। पेट्रोल के दाम सौ रुपए के आसपास और डीजल के दाम 90 रुपए प्रति लीटर के आसपास स्थिर हैं। लेकिन इस दौरान दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमत में बड़ी कमी आई है और साथ ही रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने का भारत ने रिकॉर्ड बनाया है। यह कमाल है कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद जहां सारी दुनिया रूस से दूरी बना रही है वहीं भारत ने रूस से पिछले साल रिकॉर्ड खरीद की है। दिसंबर आते आते भारत रोज इराक और सऊदी अरब से भी ज्यादा तेल रूस से खरीदने लगा।

अक्टूबर और नवंबर में भारत ने रूस से हर दिन नौ लाख बैरल से कुछ ज्यादा कच्चा तेल खरीद था। लेकिन दिसंबर में भारत ने हर दिन 12 लाख बैरल के करीब तेल खरीदा। यह इराक और सऊदी अरब से होने वाली खरीद से काफी ज्याद है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घट कर 75 डॉलर प्रति बैरल है और रूस से कोई 60 डॉलर प्रति बैरल में खरीद हो रही है। इसके बावजूद भारत में खुदरा बाजार में कीमत नहीं कम की जा रही है। ऊंची कीमत रख कर सरकारें और कंपनियां रिकॉर्ड कमाई कर रही हैं। दिसंबर में खत्म हुई तिमाही में तेल कंपनियों का मुनाफा 82 फीसदी बढ़ा है। भारत सरकार चालू वित्त वर्ष यानी 2022-23 में तेल से आठ लाख करोड़ रुपया कमाएगी तो राज्य सरकारें तीन लाख करोड़ रुपए की कमाई करेंगी।

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