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देश में तैयार हो रहे कई एमआरओ केंद्र, एयर इंडिया ने दिल्ली में रखी आधारशिला

टाटा समूह की विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया ने शुक्रवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक अत्याधुनिक एमआरओ संयंत्र की आधारशिला रखी। यह न सिर्फ एयरलाइंस के लिए बचत का जरिया बनेगा बल्कि देश को इस क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनाने में मदद भी मिलेगी।

विमानों की रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉलिंग (एमआरओ) की सुविधा वाला यह हैंगर नौ एकड़ में बनेगा। यहां पर एक वाइडबॉडी और एक नैरोबॉडी विमान एक साथ खड़े करने की सुविधा होगी, यानी यहां उनकी मरम्मत और ओवरहॉलिंग एक साथ की जा सकेगी।

दिल्ली एयर इंडिया के परिचालन का सबसे बड़ा हब है, लेकिन अबतक यहां उसकी कोई एमआरओ सुविधा नहीं है। नागपुर में शिड्यूल रखरखाव से संबंधित कुछ कामों के लिए उसका एक केंद्र जरूर है, लेकिन वह भी हर प्रकार की एमआरओ सुविधा देने में समर्थ नहीं है।

एयर इंडिया ही नहीं देश की दूसरी विमान सेवा कंपनियां भी एमआरओ के लिए लगभग पूरी तरह विदेशों पर आश्रित हैं। उद्योग जगत के अनुमान के अनुसार, इस मद में हर साल औसतन 1.5 अरब डॉलर का खर्च आता है। देश में ही एमआरओ की अत्याधुनिक सुविधा होने से विदेशी मुद्रा की बचत के साथ कंपनियों के लिए एमआरओ पर होने वाला खर्च भी कम हो जायेगा।

एयर इंडिया के बयान में कहा गया है नई एमआरओ सुविधा एयर इंडिया की इन-हाउस रखरखाव क्षमताओं को बढ़ाने और अपने बेड़े की विश्वसनीयता में सुधार लाने की कोशिशों में मदद करेगी। साथ ही, यह देश में एक मजबूत विमानन पारितंत्र के विकास में भी योगदान देगी। रखरखाव की बेहतर कार्यक्षमता से परिचालन प्रदर्शन में सुधार होने और यात्रियों को अधिक भरोसेमंद यात्रा अनुभव मिलने की भी उम्मीद है।

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इसके अलावा, एयर इंडिया की एक मेगा एमआरओ सुविधा बेंगलुरु में बन रही है जिसमें तीन वाइडबॉडी हैंगर और नौ नौरोबॉडी हैंगर होंगे। बेंगलुरु और दिल्ली में एमआरओ केंद्रों के तैयार होने तक मुंबई में पुराने वाइडबॉडी हैंगर को नये सिरे से तैयार किया गया है।

यात्री संख्या के हिसाब से देश की सबसे बड़ी विमान सेवा कंपनी इंडिगो की बेंगलुरु के केंपेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दो एमआरओ सुविधाएं हैं। इसके अलावा, कंपनी बेंगलुरु में ही एक और एमआरओ सुविधा का निर्माण कर रही है जिसकी क्षमता पहले की दोनों सुविधाओं की संयुक्त क्षमता से भी अधिक होगी। अकासा एयर ने दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अपनी एमआरओ सुविधा शुरू करने के लिए एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है।

वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो एमआरओ बाजार का आकार साल 2022 के 91 अरब डॉलर से बढ़कर साल 2030 तक 134 अरब डॉलर का होने का अनुमान है। वहीं, भारत के एमआरओ उद्योग का आकार साल 2021 के 1.7 अरब डॉलर से बढ़कर साल 2031 तक चार अरब डॉलर पर पहुंचने की उम्मीद है। जहां वैश्विक सालाना वृद्धि दर 4.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, वहीं भारत में इस क्षेत्र के 8.9 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है।

भारतीय विमान सेवा कंपनियों ने 1,500 से अधिक विमानों के ऑर्डर किए हुए हैं। विमानों की बढ़ती संख्या के साथ उनके एमआरओ की जरूरत भी बढ़ेगी। इसे देखते हुए हर बड़ी एयरलाइंस अपना एमआरओ केंद्र बनाने की पहल कर रही है ताकि अपनी जरूरतों के साथ दूसरी विमान सेवा कंपनियों को एमआरओ सेवा देकर अतिरिक्त कमाई भी हो सके।

Pic Credit : UNI

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