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दिल्ली में 27 साल बाद कमल

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 27 साल के बाद भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता में वापसी की है। भाजपा ने दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों में से 48 सीटें जीत कर दो तिहाई बहुमत हासिल किया है। पिछले चुनाव में 62 सीटें जीतने वाली आम आदमी पार्टी को महज 22 सीटें मिली हैं। कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली है। यह लगातार तीसरा चुनाव है, जिसमें कांग्रेस का खाता नहीं खुला है। भाजपा ने 1993 में 49 सीटें जीत कर सरकार बनाई थी और मदनलाल खुराना पहले मुख्यमंत्री बने थे। पांच साल के कार्यकाल में भाजपा ने तीन मुख्यमंत्री बनाए और उसके बाद पार्टी फिर सत्ता में नहीं आ सकी थी।

बहरहाल, पांच फरवरी को हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 71 फीसदी स्ट्राइक रेट के साथ 48 सीटें जीतीं। वह 68 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। भाजपा ने दो सीटें अपनी सहयोगी पार्टियों जनता दल यू और लोक जनशक्ति पार्टी के लिए छोड़ी थी। लेकिन बुराड़ी सीट पर जनता दल यू और देवली सीट पर लोक जनशक्ति पार्टी का उम्मीदवार चुनाव हार गया। भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों को 47.3 फीसदी वोट मिले, जो पिछले चुनाव से करीब नौ फीसदी ज्यादा है। भाजपा को पिछली बार सिर्फ आठ सीटें मिली थीं और इस बार वह इससे छह गुना यानी 48 सीट जीतने में कामयाब रही है।

दूसरी ओर आम आदमी पार्टी 70 सीटों पर लड़ी थी और उसे सिर्फ 22 सीटें मिली हैं। उसका स्ट्राइक रेट 31 फीसदी का रहा। पिछली बार आप को 53 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे और उसने 62 सीटें जीती थीं। इस बार आप को 43 फीसदी से कुछ ज्यादा वोट मिले हैं और उसकी सीटें 62 से घट कर 22 रह गईं। उसने 10 फीसदी वोट और 40 सीटें गंवाई है। पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल और पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित पार्टी के ज्यादातर दिग्गज नेता चुनाव हार गए। मुख्यमंत्री आतिशी किसी तरह से अपनी कालकाजी सीट बचाने में कामयाब रहीं। उन्होंने भाजपा के रमेश बिधूड़ी को हराया।

कांग्रेस पार्टी को लगातार तीसरी बार एक भी सीट नहीं मिली है। लेकिन उसके लिए संतोष की बात यह है कि उसका वोट दो फीसदी से ज्यादा बढ़ गया। इस बार उसे साढ़े छह फीसदी के करीब वोट मिला है। इसके बावजूद कांग्रेस के 70 में से 60 से ज्यादा उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने जेल में बंद दो नेताओं को टिकट दी थी। लेकिन मुस्तफाबाद और ओखला से लड़े ये दोनों उम्मीदवार चुनाव हार गए। भाजपा ने दो पूर्व मुख्यमंत्रियों को बेटों को टिकट दी थी और दोनों चुनाव जीत गए। साहिब सिंह वर्मा के बेटे परवेश वर्मा नई दिल्ली से और मदनलाल खुराना के बेटे हरीश खुराना मोतीनगर सीट से चुनाव जीते हैं। भाजपा के दिग्गज दलित नेता और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम करोलबाग सीट पर चुनाव हार गए। दिल्ली में सबसे ज्यादा करीब 43 हजार वोट से मटिया महल सीट पर आप के आले मोहम्मद इकबाल जीते तो सबसे कम 344 वोट के अंतर से संगम विहार सीट पर भाजपा के चंदन चौधरी जीते हैं। दिल्ली विधानसभा में इस बार सिर्फ पांच महिलाएं जीत पाई हैं, पिछली बार यह संख्या आठ थी।

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