कर्नाटक में बस किराए और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ भाजपा और ट्रेड यूनियनों ने राज्यभर में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन किया है। रोजाना बस से सफर करने वालों से लेकर दूध और दही खरीदने वाले परिवारों तक कीमतों में हुए इस बदलाव का असर कर्नाटक के शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में महसूस किया जा रहा है। विपक्ष ने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया है कि वह जरूरी सेवाओं और सामानों को लगातार महंगा कर रही है।
ताजा बढ़ोतरी के बाद कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) और अन्य सरकारी परिवहन निगमों में बस का किराया औसतन 23 प्रतिशत बढ़ गया है, जबकि बेंगलुरु महानगर परिवहन निगम (बीएमटीसी) में किराए में 33 से 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। परिवहन किराए में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब दूध की कीमतों में 4 रुपये प्रति लीटर और दही की कीमतों में 14 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है, जिससे परिवारों का मासिक खर्च और बढ़ गया है।
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कीमतों में इस बढ़ोतरी ने छोटे व्यवसायों, खासकर होटलों, रेस्तरां और चाय की दुकानों के मालिकों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। इन जगहों पर दूध और डेयरी उत्पादों का इस्तेमाल मुख्य रूप से होता है और इन्हें खरीदने की लागत बढ़ने का मतलब है कि अंततः ग्राहकों को भी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। भाजपा ने सरकार के खिलाफ अपना हमला तेज कर दिया है और बस किराए तथा डेयरी उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के विरोध में प्रदर्शन किए हैं। गुरुवार को पार्टी कार्यकर्ता बेंगलुरु के मैजेस्टिक बस टर्मिनल पर इकट्ठा हुए। उन्होंने किराया बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग की और आरोप लगाया कि सरकार अपने वित्तीय कुप्रबंधन का बोझ जनता पर डाल रही है।
ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी) ने भी परिवहन किराए में की गई बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेने की मांग की है। संगठन के कर्नाटक राज्य सचिव के. सोमशेखर यादगीर ने इस बढ़ोतरी को ‘जन-विरोधी’ करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि परिवहन निगमों को हो रहा नुकसान यात्रियों की वजह से नहीं बल्कि कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार का नतीजा है।
ट्रेड यूनियन का कहना है कि कीमतों में लगातार हो रही यह बढ़ोतरी उन कामकाजी परिवारों के लिए विशेष रूप से मुश्किल है, जो पहले से ही बेरोजगारी, रुकी हुई मजदूरी और जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सूखे से प्रभावित इलाकों में ग्रामीण परिवारों के सामने आ रही आर्थिक कठिनाइयों की ओर भी ध्यान दिलाया। सरकार ने दूध की कीमतों में बदलाव का बचाव करते हुए कहा है कि यह बढ़ोतरी डेयरी किसानों की कमाई बढ़ाने के लिए की गई है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि इस अतिरिक्त राशि का बड़ा हिस्सा दूध उत्पादकों और डेयरी यूनियनों को दिया जाएगा।
Pic Credit : UNI
