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बंगलादेश ने शेख हसीना को पासपोर्ट देने से किया इनकार

बंगलादेश ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत से वापसी की सुविधा के लिए उन्हें सामान्य पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज जारी करने से इनकार कर दिया है। विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने जोर देकर कहा कि नयी दिल्ली को दोनों देशों के बीच मौजूदा प्रत्यर्पण संधि के तहत उन्हें बंगलादेश को सौंपना चाहिए।

ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में कबीर ने यह बात कही। वह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की केंद्रीय समिति के अंतरराष्ट्रीय विभाग के मंत्री लियू हाइशिंग के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल को विदा करने पहुंचे थे। श्री कबीर ने कहा कि गंभीर अपराधों में वांछित व्यक्ति की वापसी सुनिश्चित करने के लिए पासपोर्ट की कोई आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने कहा आतंकवादियों और अपराधियों को पकड़ने के लिए भारत के साथ हमारी प्रत्यर्पण संधि है। आतंकवादियों या अपराधियों को वापस लाने के लिए पासपोर्ट की जरूरत नहीं होती। यह उन्हें सौंपने का मामला है। मृत्युदंड की सजा पा चुकीं सुश्री हसीना को भगोड़ा और आतंकवादी बताते हुए श्री कबीर ने सवाल किया कि सरकार उन्हें एक सामान्य यात्री की तरह क्यों देखे।

उन्होंने कहा हम उन्हें सौंपने की मांग कर रहे हैं। उन्हें बंगलादेश को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बंगलादेश प्रत्यर्पण संधि के तहत स्थापित कानूनी और राजनयिक माध्यमों से इस मामले को आगे बढ़ाएगा।

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बंगलादेश कई बार सुश्री हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर चुका है, लेकिन भारत ने अब तक उन्हें सौंपने से इनकार किया है। सुश्री हसीना अगस्त 2024 में अपनी सरकार के सत्ता से हटने के बाद बंगलादेश छोड़कर भारत आ गई थीं और तब से यहीं निर्वासन में रह रही हैं। उनके प्रशासन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई घातक कार्रवाई के मामले में उन्हें मृत्युदंड सुनाया गया है। इसके बावजूद उन्होंने दिसंबर में बंगलादेश लौटने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

बंगलादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने तीन अक्टूबर को कहा था कि प्रत्यर्पण अनुरोध पर स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत विचार किया जा रहा है। इस मामले में अदालतों की भूमिका होने के कारण कोई समयसीमा बताना संभव नहीं है।

श्री त्रिवेदी ने कहा भारत सरकार ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के माध्यम से स्पष्ट किया है कि इसके लिए एक प्रक्रिया है, जिसमें कानूनी पहलू शामिल हैं और जो सुव्यवस्थित है। जहां तक इस मामले का सवाल है, प्रक्रिया जारी है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि सुश्री हसीना जब भारत पहुंची थीं, तब वह बंगलादेश की प्रधानमंत्री थीं और पड़ोसी देश होने के नाते भारत ने उस समय की परिस्थितियों के अनुरूप कदम उठाया था। उन्होंने कहा उस समय सुश्री हसीना बंगलादेश की प्रधानमंत्री थीं। हमारे पास उस स्थिति में शायद ही कोई विकल्प था। पड़ोसी होने के नाते वास्तविकता को स्वीकार करना हमारा कर्तव्य था।

श्री त्रिवेदी ने उन दावों को भी खारिज किया कि सुश्री हसीना को भारतीय वायुसेना या सेना भारत लेकर आई थी। उन्होंने कहा कि अगस्त 2024 में बंगलादेश में तेजी से बदलती परिस्थितियों के बीच उनका भारत पहुंचना हुआ था। उन्होंने सवाल किया कि उस समय भारत के पास दूसरा क्या विकल्प था और कहा कि सुश्री हसीना को विमान उतारने की अनुमति नहीं देने से अप्रत्याशित स्थिति पैदा हो सकती थी।

सुश्री हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा बंगलादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने भी अगस्त में ढाका में त्रिवेदी के साथ बैठक के दौरान उठाया था। इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि इस अनुरोध की स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार जांच की जा रही है।

Pic Credit : UNI

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