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यह चीन भी जानता है कि उसके कुछ स्थानों के नाम बदल देने से अरुणाचल प्रदेश की स्थिति में वास्तव में कोई बदलाव आने नहीं वाला है। इसके बावजूद वह ऐसा करता है, तो इसके पीछे उसकी सोची-समझी रणनीति है।

भारत ने यह उचित कहा है कि अरुणाचल प्रदेश में 11 जगहों के नाम बदलने के चीन के एलान से हकीकत में कुछ नहीं बदलेगा। भारत के इस बयान भी सटीक है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा है और रहेगा। इसके बावजूद नाम बदलने की घटना को हलके से लेना ठीक नहीं होगा। यह चीन भी जानता है कि उसके कुछ स्थानों के नाम बदल देने से अरुणाचल प्रदेश की स्थिति में वास्तव में कोई बदलाव आने नहीं वाला है। इसके बावजूद वह ऐसा करता है, तो इसके पीछे उसकी सोची-समझी रणनीति है। इसके जरिए वह इस प्रदेश पर अपना दावा गरम रखना चाहता है। इसका इस्तेमाल वह भारत से सीमा विवाद पर होने वाली वार्ता में सौदेबाजी के तौर पर करेगा। कुछ रोज पहले चीन की तरफ से एक बयान आया था, जिसमें कहा गया कि लद्दाख इलाके में तीन साल पहले सीमा पर जो अस्थिरता बनी थी, वह अब दूर हो गई है। यानी चीन यह मान रहा है कि लद्दाख की तरफ अब कोई समस्या नहीं है।

इसलिए वह सीमा के पूर्वी तरफ स्थिति को गरमा रहा है। पश्चिम में उठे विवाद पर भारत सरकार मजबूती दिखाने में विफल रही। यहां तक कि प्रधानमंत्री ने यह कह दिया कि सीमा पर कोई घुसपैठ नहीं हुई है। इससे चीन का काम आसान हो गया। लेकिन उससे चीन के इरादे शांत नहीं हुए। चीन का मनोबल विदेश मंत्री के इस बयान से भी बढ़ा हो सकता है कि अपेक्षाकृत कमजोर अर्थव्यवस्था वाला भारत मजबूत चीन से युद्ध नहीं कर सकता। तो अब अरुणाचल में उसका असर देखने को मिला है। चीन ने अरुणाचल प्रदेश में 11 भौगोलिक रचनाओं के चीनी नामों की घोषणा की है। चीन अरुणाचल को तिब्बत का दक्षिणी हिस्सा ‘जांगनान’ कहता है और उसे अपना हिस्सा मानता है। प्रदेश को लेकर चीन की यह तीसरी सूची है। चीन सरकार ने इस तरह के छह स्थानों के चीनी नामों की सूची पहली बार 2017 में जारी की थी। कुल मिलाकर चीन अभी तक इस तरह अरुणाचल के 32 स्थानों की चीनी नामों की सूची जारी कर चुका है।

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