Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

आरक्षण का आधार सिर्फ गरीबी हो

भोपाल में कर्णी सेना ने एक अपूर्व प्रदर्शन आयोजित किया और मांग की कि सरकारी नौकरियों, चुनावों और शिक्षण संस्थाओं में, जहां भी आरक्षण की व्यवस्था है, वहाँ सिर्फ गरीबी के आधार पर आरक्षण दिया जाए। यह कर्णी सेना राजपूतों का संगठन है। इसने जातीय आरक्षण के विरुद्ध सीधी आवाज नहीं उठाई है, क्योंकि यह खुद ही जातीय संगठन है लेकिन इस समय देश में जहाँ भी आरक्षण दिया जा रहा है, वह प्रायः जातीय आधार पर ही दिया जा रहा है। यदि सिर्फ गरीबी के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था बन जाए तो जाति भेदभाव के बिना भी देश के सभी कमजोर लोगों को आरक्षण मिल सकता है।

यह मांग तो भारत के कम्युनिस्टों को सबसे ज्यादा करनी चाहिए, क्योंकि कार्ल मार्क्स ने ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ में सबसे ज्यादा हिमायत इसी गरीब वर्ग की है। उन्होंने इसे सर्वहारा (प्रोलेटेरिएट) कहा है। कम्युनिस्टों की क्या कहें, देश की सभी पार्टियां थोक वोटों की गुलाम हैं। थोक वोटों का सबसे बड़ा श्रोत जातियाँ ही हैं। इसीलिए देश के किसी नेता या पार्टी में इतना दम नहीं है कि वह जातीय आरक्षण का विरोध करे। बल्कि कई अन्य जातियों के नेता आजकल अपने लिए आरक्षण के आंदोलन चला रहे हैं।

यदि कर्णी सेना के राजपूत लोग अपने आंदोलन में सभी जातियों को जोड़ लें (अनुसूचित जातियों को भी) तो वह सचमुच महान राष्ट्रीय आंदोलन बन सकता है। अनेक अनुसूचित लोग, जो स्वाभिमानी हैं और दूसरों की दया पर निर्भर रहना गलत मानते हैं, वे भी कर्णी सेना के साथ आ जाएंगे। कर्णी सेना की यह मांग भी सही है कि किसी भी परिवार की सिर्फ एक पीढ़ी को आरक्षण दिया जाए ताकि अगली पीढ़ियाँ आत्म-निर्भर हो जाएं। कर्णी सेना की यह मांग भी उचित प्रतीत होती है कि उस कानून को वापिस लिया जाए, जिसके मुताबिक किसी भी अनुसूचित व्यक्ति की शिकायत के आधार पर किसी को भी जाँच किए बिना ही गिरफ्तार कर लिया जाता है।

इसमें शक नहीं है कि देश के अनुसूचितों ने सदियों से बहुत जुल्म सहे हैं और उनके प्रति न्याय होना बेहद जरूरी है लेकिन हम भारत में ऐसा समाज बनाने की भूल न करें, जो जातीय आधार पर हजारों टुकड़ों में बंटता चला जाए। भारत और पड़ौसी देशों के तथाकथित अनुसूचित और पिछड़े लोगों को आगे बढ़ाने का उपाय जातीय आरक्षण नहीं है।

उन्हें और तथाकथित ऊँची जातियों के लोगों को भी जन्म के आधार पर नहीं, जरूरत के आधार पर आरक्षण दिया जाए। यदि हम आरक्षण का आधार ठीक कर लें तो देश में समता और संपन्नता का भवन तो अपने आप ही खड़ा हो जाएगा।

Exit mobile version