आरक्षण की बहस कहां तक जाएगी?
आरक्षण की व्यवस्था पर देश में बहस हो रही है। अच्छी बात है। बहस होनी चाहिए। अगर पहले बहस हुई होती और समय की जरुरत के हिसाब से आरक्षण की व्यवस्था में बदलाव किया गया होता तो देश की अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ी जातियों की स्थिति बहुत बेहतर हो गई होती और संभव था कि आरक्षण की व्यवस्था भी समाप्त हो जाती। लेकिन अफसोस की बात है कि एफर्मेटिव एक्शन के नाम से शुरू हुई आरक्षण की व्यवस्था देश की कमजोर, वंचित और पिछड़ी जातियों के उत्थान की बजाय चंद नेताओं की राजनीति साधने का हथियार बन गई।...