देहरादून। कोई 10 साल पहले बिहार में आरक्षण की समीक्षा की जरुरत का बयान देने वाले राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि अगर दो सौ साल तक आरक्षण देना पड़े तो वह भी देना चाहिए। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि समाज के एक वर्ग का दो हजार साल तक उत्पीड़न हुआ है। मोहन भागवत ने इस देश में रहने वाले सभी नागरिकों को हिंदू बताते हुए कहा कि हिंदू बनने के लिए कुछ छोड़ना नहीं पड़ता है।
देहरादून में प्रबुद्धजनों की गोष्ठी में संघ प्रमुख ने कहा, ‘हिंदू समाज के एक हिस्से ने करीब दो हजार साल तक छुआछूत और भेदभाव सहा, लेकिन फिर भी उसने देश के साथ कभी विश्वासघात नहीं किया। ऐसे लोगों को बराबरी का हक दिलाने के लिए अगर दो सौ साल तक भी आरक्षण देना पड़े, तो समाज को इसके लिए तैयार रहना चाहिए’। उन्होंने कहा, ‘अगर अपने ही भाइयों को आगे बढ़ाने के लिए हमें कुछ नुकसान भी सहना पड़े, तो भी हमें पीछे नहीं हटना चाहिए’।
असल में आरएसएस के शताब्दी वर्ष में संघ प्रमुख देश के अलग अलग हिस्सों में आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। सोमवार को उन्होंने उत्तराखंड के देहरादून में हिमालयन कल्चरल सेंटर में आयोजित प्रमुख लोगों की गोष्ठी में पूर्व सैनिकों और अधिकारियों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोगों के पूर्वज एक हैं और उनकी रगों में एक ही खून बहता है।
भागवत ने कहा, हिंदू बनने के लिए कुछ छोड़ना नहीं पड़ता, देश के प्रति निष्ठा ही पर्याप्त है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘भारत में अनेक पूजा पद्धतियां हैं और उनसे कोई विरोध नहीं है। सभी के पूर्वज एक हैं और सभी की रगों में एक ही खून है। हिंदू बनने के लिए कुछ छोड़ना नहीं पड़ता; देश के प्रति निष्ठा ही पर्याप्त है। आज जिनका विरोध है, उन्हें भी कल जोड़ना है, वे अपने ही हैं’।


