नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार संधि के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 27 जनवरी को भारत ने यूरोप के 27 देशों के साथ मुक्त व्यापार संधि पर दस्तखत किया है। उन्होंने कहा कि इससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा, नई इनोवेशन साझेदारियां बनेंगी और वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन मजबूत होगी। मोदी ने कहा कि यह सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि साझा समृद्धि का रोडमैप है। समझौते के बाद यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लियेन ने कहा कि इस समझौते से दोनों तरफ लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस समझौते के तहत भारत और यूरोपीय संघ मि लकर इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि इस समय दुनिया में वैश्विक व्यवस्था को लेकर उथल पुथल है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार बहुत जरूरी हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और यूरोपीय संघ के बिजनेस फोरम को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा, ‘आज दुनिया में व्यापार तकनीक और रेयर खनिजों को हथियार बनाकर इनका इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, इसलिए भारत और यूरोपीय संघ को मिलकर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए’।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लियेन ने कहा कि इस मुक्त व्यापार संधि से हर साल करीब चार अरब यूरो यानी 43 हजार करोड़ रुपए के टैरिफ कम होंगे और भारत व यूरोप में लाखों लोगों के लिए रोजगार के नए मौके बनेंगे। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय की व्यापार संधि दुनिया को साफ संदेश देती है कि आज की ग्लोबल चुनौतियों का सबसे अच्छा जवाब आपसी सहयोग है, न कि अलग थलग होकर फैसले लेना।
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने खुद को प्रवासी भारतीय बताया। उन्होंने कहा, ‘मैं यूरोपीय परिषद का अध्यक्ष हूं, लेकिन साथ ही मैं एक ओवरसीज इंडियन सिटिजन भी हूं। इसलिए, जैसा आप समझ सकते हैं, मेरे लिए इसका एक खास भावनात्मक मतलब है’। कोस्टा ने आगे कहा, ‘मुझे अपनी गोवा से जुड़ी पहचान पर बहुत गर्व है, जहां से मेरे पिता का परिवार आया है। यूरोप और भारत के बीच का रिश्ता मेरे लिए सिर्फ आधिकारिक नहीं, बल्कि निजी भी है’।
