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डिजिटल फ्रॉड पर गाइडलाइन बनाने का निर्देश

New Delhi, May 22 (ANI): A view of the Supreme Court of India, in New Delhi on Thursday. (ANI Photo/Rahul Singh)

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में बढ़ रहे डिजिटल फ्रॉड से निपटने के लिए सरकार को गाइडलाइन बनाने को कहा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। सोमवार को इस मसले पर हुई सुनवाई में सर्वोच्च अदालत ने डिजिटल फ्रॉड से हुई 54 हजार करोड़ की ठगी को डकैती और लूट बताया। कोर्ट ने कहा कि यह रकम कई छोटे राज्यों के बजट से भी ज्यादा है।

सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि ये अपराध बैंक अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही से हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, दूरसंचार विभाग और अन्य बैंकों को डिजिटल अरेस्ट के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए फ्रेमवर्क तैयार करने को कहा। साथ ही गृह मंत्रालय से रिजर्व बैंक और दूरसंचार विभाग के नियमों को देखकर चार हफ्ते में मसौदा तैयार करने को कहा है।

मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर, 2025 को डिजिटल अरेस्ट जैसे ऑनलाइन ठगी के मामलों पर केंद्र से पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा था। हरियाणा के एक बुजुर्ग दंपत्ति के साथ हुई ठगी के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चिंता जताई कि साइबर अपराधी इस तरीके से देश से बेहद बड़ी रकम बाहर भेज रहे हैं। अदालत ने इस मामलों की जांच सीबीआई को सौंप दी है और साथ ही कई राज्य सरकारों से भी कहा कि वे ऐसे मामलों की सीबीआई जांच की सिफारिश करें।

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