बिहार में सम्पन्न हुए बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत हासिल कर जनसुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चुनौती को ध्वस्त करते हुए उनके चक्रव्यूह को तोड़ दिया है।
श्री किशोर ने प्रतिष्ठा की इस लड़ाई में जातीय समीकरणों को तोड़ते हुए भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा को 19324 मतों से परास्त कर बिहार में बदलती हुई एक नई राजनीति के संकेत दिए। श्री किशोर को 64117 मत मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 44827 मतों से संतोष करना पड़ा। पिछले चुनाव में करीब 46 हजार मत पाने वाली राष्ट्रीय जनता दल की रेखा गुप्ता 14273 मत हासिल कर तीसरे स्थान पर रही।
इस चुनाव पर समूचे देश की निगाहें टिकी हुई थीं, सभी इस बात का इंतजार कर रहे थे कि विख्यात चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पहली चुनावी एंट्री का परिणाम क्या होगा।
जनसुराज के सूत्रधार की इस जीत ने 1967 में बांकीपुर (तब पटना पश्चिम) विधानसभा सीट पर जनक्रांति दल के महामाया प्रसाद सिन्हा के हाथों मुख्यमंत्री केबी सहाय की हार की याद दिला दी है। हालांकि 1967 का चुनाव उपचुनाव नही था और प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री सहाय को परास्त करने वाले श्री सिन्हा बिहार के पहले गैरकांग्रेसी मुख्यमंत्री बने थे।
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प्रशांत किशोर की यह जीत कई मायने में खास है। उनके खिलाफ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने अपने महारथी नेताओं की पूरी सेना उतार दी थी। इन महारथियों में नेता, अभिनेता, गायक और सामाजिक कार्यकर्ता सभी शामिल थे। खुद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भाजपा प्रत्याशी नीरज सिन्हा के पक्ष में प्रचार के लिए मैदान में उतरे।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का क्षेत्र होने के नाते उनकी भी प्रतिष्ठा दांव पर थी इस क्षेत्र में मतों को साधने के लिए उनके साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और उनकी टोली को लगाया गया था। श्री प्रसाद के पिता तथा भारतीय जनसंघ के बड़े नेता ठाकुर प्रसाद 1977 में इस क्षेत्र से विधायक बने थे। करीब तीन लाख 70 हजार मतदाताओं के क्षेत्र बांकीपुर में राजधानी के जाने माने पूर्व सांसद और दानापुर के विधायक रामकृपाल यादव तथा फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह को भी स्टार प्रचारक की सूची में शामिल किया गया था।
इन प्रचारकों के साथ ग्लैमर का तड़का भोजपुरी फिल्म स्टार तथा सांसद मनोज तिवारी और हाल ही में विधान पार्षद बने पवन सिंह लगा रहे थे। इसमें थोड़ा और रंग भरने ले लिए अलीनगर से चुनी गई विधायक और मशहूर गायिका मैथिली ठाकुर की भी सेवाएं ली गयी थी। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी, दिलीप जायसवाल, मंगल पांडेय सहित सभी वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार के मंत्री राजग उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने में जुटे हुए थे। यहां तक कि गठबंधन की संयुक्त बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सारे विधायकों से आग्रह किया कि वह बांकीपुर में रोजाना दो घन्टे समय निकाल कर जाएं और गठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करें। ये सारे प्रयास विफल रहे और जनसुराज के सूत्रधार ने भाजपा के किले को ढाह कर बिहार विधानसभा में अपनी पार्टी का खाता खोलाने के साथ विपक्ष की राजनीतिक को संजीवनी बूटी प्रदान कर दी है।
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