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एससी दर्जे को लेकर बड़ा फैसला

New Delhi, May 22 (ANI): A view of the Supreme Court of India, in New Delhi on Thursday. (ANI Photo/Rahul Singh)

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने धर्म परिवर्तन के बाद अनुसूचित जाति का दर्जा कायम रखने के मसले पर बड़ा फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने मंगलवार को कहा कि सिर्फ हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से जुड़े लोग ही धर्म परिवर्तन के बाद अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं। अदालत ने कहा कि अगर कोई ईसाई या किसी और धर्म में धर्मांतरण करता है तो वह अनुसूचित जाति का दर्जा खो देगा।

जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ईसाई धर्म अपनाने वाला दलित व्यक्ति अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) कानून के तहत मिलने वाले किसी भी संरक्षण का दावा नहीं कर सकता है। यह फैसला आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के मई 2025 के फैसले के खिलाफ लगाई गई चिंथदा की याचिका पर सुनाया गया।

धर्म परिवर्तन के बाद पादरी बने चिंथदा आनंद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी कि उन्हें अक्काला रामिरेड्डी सहित कुछ लोगों से जातिगत भेदभाव और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। मूल रूप से अनुसूचित जाति के चिंथदा ने ईसाई धर्म अपना लिया और पादरी बन गया। कुछ दिन बाद गुंटूर जिले के कोथापलेम में रहने वाले अक्कला रामी रेड‌्डी नाम के शख्स पर चिंथदा ने आरोप लगाया कि अक्कला ने उसे जातिसूचक गालियां दी हैं।

गौरतलब है कि 1985 के सूसाई बनाम भारत सरकार से जुड़े एक केस में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यदि कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपनाने के बाद दोबारा हिंदू धर्म में लौटता है, तो उसे एससी दर्जा प्राप्त करने के लिए विश्वसनीय प्रमाण और समुदाय की स्वीकृति की जरूरत होगी। केवल लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से धर्म परिवर्तन करने को सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के साथ धोखा करार दिया।

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