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राजस्थान में अरावली बचाने का आंदोलन

जयपुर। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के बयान और आश्वासन के बाद भी अरावली बचाने का आंदोलन थम नहीं रहा है, बल्कि और तेज होता जा रहा है। सोमवार को राजस्थान के कई इलाकों में लोगों ने प्रदर्शन किए और जोधपुर में लोगों की पुलिस के साथ झड़प भी हुई। मंगलवार को भी कोटा सहित कई इलाकों में प्रदर्शन का ऐलान पहले ही कर दिया गया है।

सोमवार के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस ने किया। कांग्रेस और सामाजिक संगठनों के लोगों की उदयपुर कलेक्ट्रेट में पुलिस से धक्का मुक्की हुई। पुलिस ने कुछ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार भी किया। सीकर में हर्ष पर्वत पर प्रदर्शन किया गया। अलवर में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा, राजस्थान के लिए अरावली फेफड़े के समान है। इस फैसले को वापस लेना होगा, नहीं तो कांग्रेस उग्र आंदोलन करेगी।

जोधपुर में एनएसयूआई कार्यकर्ता प्रदर्शन के दौरान बेरिकेड्स पर चढ़ गए। पुलिस ने लाठी चलाकर भीड़ को खदेड़ा। गौरतलब है कि 20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार जमीन से एक सौ मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही अरावली पहाड़ी का हिस्सा माना जाएगा। इस मानक से अरावली की 90 फीसदी से ज्यादा पहाड़ियां संरक्षण के दायरे से बाहर हो जाएगी। इस फैसले के बाद अरावली बचाने का आंदोलन तेज हुआ है।

अरावली को बचाने के लिए हाड़ौती पर्यावरण संरक्षण समिति व चंबल बचाओ अभियान समिति ने मंगलवार को कोटा में आंदोलन की चेतावनी दी है। आंदोलन की रूप रेखा तैयार करने को लेकर दोनों संगठनों ने मंगलवार को किशोर सागर तालाब स्थित बारादरी पर पर्यावरण प्रेमियों की बैठक बुलाई है। गौरतलब है कि अरावली चार राज्यों की जीवन रेखा है। इसमें दिल्ली और हरियाणा में अवैध खनन से अरावली पर्वत शृंखला को बड़ा नुकसान हुआ है। लेकिन राजस्थान और गुजरात में अभी यह सुरक्षित है।

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