अरावली को बख्श दें
जब देश में प्रदूषण के भयंकर नतीजे देखने को मिल रहे हैं, उस समय अरावली की परिभाषा बदलने का विचार आया ही क्यों? समस्या विकास और समृद्धि की वह समझ है, जिसमें शुद्ध वातावरण की जरूरत मायने नहीं रखती। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री के इस स्पष्टीकरण से शायद ही कोई आश्वस्त हो कि अरावली पहाड़ियों की नई परिभाषा सिर्फ खनन के लिए लागू होगी। यानी रियल एस्टेट या अन्य विकास परियोजनाओं के लिए पुरानी परिभाषा लागू रहेगी। भूपेंद्र यादव का यह आश्वासन भी आशंकाओं का निराकरण नहीं कर सकेगा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में खनन की इजाजत नहीं दी जाएगी।...