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राहुल ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर बलप्रयोग को लेकर लोकसभा में गृह मंत्री पर लगाए गंभीर आरोप

New Delhi, Jul 29 (ANI): Lok Sabha LoP Rahul Gandhi and Congress MP KC Venugopal in Lok Sabha during the Monsoon Session of Parliament, in New Delhi on Wednesday. (Sansad TV/ANI Video Grab)

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर बुधवार को लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए, जिसका सत्तापक्ष ने तीखा विरोध किया और उनसे माफी की मांग की।

राहुल गांधी ने ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान छात्रों के आंदोलन का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री शाह को लेकर गंभीर आरोप लगाया।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष बताएं कि किस आधार पर उन्होंने देश के एक जिम्मेदार व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाया है या फिर वह माफी मांगें।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष बिना किसी तथ्य, जांच और साक्ष्य के किसी के ऊपर आरोप नहीं लगा सकते।

सदन में हंगामे के कारण लोकसभा अध्यक्ष ने बैठक एक बजकर 53 मिनट पर अपराह्न दो बजकर 30 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

राहुल गांधी ने चर्चा में भाग लेने के दौरान आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था की आत्मा पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वैचारिक संगठन ने कब्जा कर लिया है और पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तो सिर्फ एक प्रतीक मात्र थे।

उन्होंने छात्रों के विरोध प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए यह भी कहा कि प्रदर्शनकारी बच्चों के माता-पिता में साहस नहीं है कि वो भाजपा और उसके वैचारिक संगठन का मुकाबला करें, लेकिन ये बच्चे सामने खड़े हो गए।

राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों ने डर को बाहर निकालकर चुनौती दी और खुलकर सवाल किया।

उनका कहना था, ‘‘छात्रों ने अपना डर छोड़ दिया। उन्होंने इस सोच को चुनौती दी कि उनकी आवाज़ उठाने पर उनका करियर बर्बाद किया जा सकता है। छात्रों ने सवाल किया कि हमें रोजगार के अवसरों से क्यों वंचित किया जा रहा है, हमें अपनी पसंद के व्यक्ति से प्रेम करने या विवाह करने का अधिकार क्यों नहीं है और अलग-अलग धर्मों को निशाना क्यों बनाया जाता है?’’

उन्होंने सदन में गृह मंत्री की गैरमौजूदगी को लेकर दावा किया कि ‘तथाकथित गृह मंत्री’ को हिम्मत नहीं है कि वह सदन में आ सकें।

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नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि ‘‘गृह मंत्री सदन में नहीं हैं क्योंकि वह डरे हुए हैं।’’इसके बाद उन्होंने छात्रों पर बलप्रयोग का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए।

इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने तीखा विरोध किया और कहा कि राहुल गांधी ने गलत बयान दिया और उन्होंने अपने विशेषाधिकार का हनन करते हुए बयान दिया जिसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं तो सरकार को बताना चाहिए कि छात्रों पर बलप्रयोग का आदेश किसने दिया था।

सत्तापक्ष के सदस्यों ने ‘राहुल गांधी माफी मांगो’ और कांग्रेस के सदस्यों ने ‘एलओपी को बोलने दो’ और ‘गृह मंत्री जवाब दो’ के नारे लगाए। सदन में काफी देर तक गतिरोध की स्थिति बनी रही।

राहुल गांधी ने कहा कि सड़कों पर इस देश के भविष्य ने जो किया, वह कोई गुस्सा, हिंसा और नफरत नहीं थी, बल्कि यह युवाओं की अभिव्यक्ति थी तथा सत्तारूढ़ दल समेत सभी दलों को इसका सम्मान करना चाहिए।

राहुल गांधी ने कहा कि अगर भाजपा के मित्र अपने बच्चों से भी इस बारे में पूछेंगे तो आंदोलनकारी बच्चों के साथ उनकी भी सहमति ही पाएंगे।

उनका कहना था कि लोग एक परीक्षा पर जितना पैसा खर्च कर रहे हैं, वह सरकार के शिक्षा बजट से ज्यादा है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि हमारी व्यवस्था क्रूर है तथा गरीबों से लाखों रुपये लिए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था पर कब्जा कर लिया गया है और भाजपा से संबंधित वैचारिक संगठन ने इस व्यवस्था की आत्मा पर कब्जा कर लिया है।

राहुल गांधी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सही कहा था कि यह सरकार संप्रग (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) की तरह नहीं हैं और उनकी सरकार में मंत्री इस्तीफा नहीं देते।

उन्होंने दावा किया कि धर्मेंद्र प्रधान ने कभी शिक्षा मंत्रालय नहीं चलाया तथा असल में मंत्रालय और शिक्षा व्यवस्था को भाजपा से संबंधित एक वैचारिक संगठन चला रहा है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्रों को ध्यान में रखना चाहिए कि यह वैचारिक संगठन ही उनका असली दुश्मन है और वह चाहता है कि आप ‘अंधभक्त’ बनें।

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इससे पहले भाषण की शुरुआत में भी राहुल गांधी ने एक शब्द का इस्तेमाल किया, जिस पर सत्तापक्ष के सदस्यों ने आपत्ति जताई।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि राहुल ने एक छात्रा का नाम लेकर जिस शब्द का इस्तेमाल किया है, वह असंसदीय शब्द है और उसे कार्यवाही से हटा देना चाहिए।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को संसद की मर्यादा के साथ विधेयक पर बोलना चाहिए।

सत्तापक्ष की टोकाटोकी के बीच राहुल गांधी ने बोलने से इनकार कर दिया और अपनी सीट पर बैठ गए।

इसके बाद रीजीजू ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने एक असंसदीय शब्द का इस्तेमाल किया, जिस पर आपत्ति जताई गई है। उन्होंने कहा कि ‘‘हम उन्हें सुनने को तैयार हैं और वह अपनी बात रखें।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आप भावुक चेहरा दिखाकर सदन को गुमराह नहीं कर सकते।’’

बिरला ने कहा कि सदन में अच्छी व्यवस्थाएं रही हैं और अच्छी मर्यादाएं रही हैं और मर्यादाएं बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘कोई मर्यादा और तर्क से बोलता है तो देश सुनता है और सम्मान भी करता है।’’

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी राहुल गांधी से भाषण जारी रखने की अपील की और सत्तापक्ष के सदस्यों से उनके भाषण के बीच में टीका-टिप्पणी नहीं करने को कहा।

इसके बाद नेता प्रतिपक्ष ने भाषण जारी रखा।

हालांकि दोनों पक्षों में नोकझोंक की स्थिति बनी रही और कार्यवाही ढाई बजे और फिर तीन बजे तक स्थगित की गई। कार्यवाही अपराह्न तीन बजे आरंभ होने पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पर चर्चा का जवाब दिया और सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।

Pic Credit : ANI

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