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मनरेगा बचाने उतरे राहुल, खड़गे

नई दिल्ली। आखिरकार राहुल गांधी मनरेगा बचाने के लिए उतरे। कंधे पर कुदाल लिए और माथे पर गमछा बांधे राहुल गांधी ने मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ कांग्रेस के मनरेगा बचाओ अभियान में शामिल हुए। राहुल ने मनरेगा की जगह लाए गए नए रोजगार कानून की आलोचना की और कहा कि जिस तरह से केंद्र की भाजपा सरकार ने किसानों के हितों पर चोट करने के लिए तीन कृषि कानून पेश किए थे उसी तरह अब मजदूरों के अधिकार छीनने के लिए नया कानून लाई है। राहुल ने कहा कि अब रोजगार का पैसा मजदूरों के पास नहीं, बल्कि ठेकेदारों और अधिकारियों के पास जाएगा।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने मनरेगा की जगह विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन यानी वीबी जी राम जी कानून बनाया है। भाजपा सरकार ने किसी तरह से शब्दों को जोड़ तोड़ करके इसमें भगवान राम का नाम बनाया है। लेकिन राहुल गांधी ने आज जी राम जी बोलने से परहेज किया। उन्होंने इसकी जगह वीबी ग्रामजी बिल कहा। नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में राहुल ने कहा कि वीबी ग्राम जी कानून एक जुमला है और गरीबों के हक पर हमला है। उन्होंने गरीबों से इसके खिलाफ एकजुट होने की अपील की।

असल में गुरुवार को रचनात्मक कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय मनरेगा श्रमिक सम्मेलन का आयोजन किया गया था। उस कार्यक्रम में राहुल और खड़गे दोनों ने सिर पर गमछा बांधा, कंधे पर कुदाल रखी और देश भर से मजदूरों की लाई मिट्‌टी पौधों में डाली। सम्मेलन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार का मनरेगा को निरस्त करना महात्मा गांधी के नाम को लोगों की यादों से मिटाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी संसद के बजट सत्र में इस मुद्दे को मजबूती से उठाएगी।

राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा, ‘मनरेगा गरीबों को अधिकार देने के लिए लाई गई योजना थी। उसका मकसद जरूरतमंदों को काम देना था। उसे त्रिस्तरीय शासन व्यवस्था यानी पंचायती राज के माध्यम से चलाया जाता था। उसमें अधिकार शब्द महत्वपूर्ण था। सभी गरीब लोगों को मनरेगा के तहत काम करने का अधिकार था। पीएम मोदी और भाजपा उस कन्सेप्ट को खत्म करना चाहती है’। उन्होंने कृषि कानूनों की तरह इसके खिलाफ भी एकजुट होकर इसे निरस्त कराने के लिए आंदोलन करने की अपील की। गौरतलब है कि कांग्रेस ने 10 जनवरी से पूरे देश में 45 दिन का मनरेगा बचाओ संग्राम की शुरुआत की थी।

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