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एसआईआर के खिलाफ विपक्षी दलों की याचिका पर चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

New Delhi, May 22 (ANI): A view of the Supreme Court of India, in New Delhi on Thursday. (ANI Photo/Rahul Singh)

उच्चतम न्यायालय ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरुद्ध लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य घटक दलों के नेताओं की ओर से दायर याचिका पर गुरुवार को चुनाव आयोग को नोटिस जारी किये।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने चुनाव आयोग के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी किये । मुख्य न्यायाधीश ने याचिका पर सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से टिप्पणी की, ” हम याचिकाकर्ताओं में से एक से उनके आचरण के बारे में भी पूछेंगे।” गौरतलब है कि 12 अक्टूबर को श्री गांधी, कांग्रेस और विपक्षी दलों के कुछ अन्य विपक्षी नेताओं ने उच्चतम न्यायालय तक एक मार्च निकाला था और उसके वे उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल करने गये थे। इससे न्यायालय परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई और हंगामा के स्थिति बन गयी थी।

याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, ममता तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी प्रसाद यादव, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के एम ए बेबी, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ईटी. मुहम्मद बशीर शामिल हैं। विदुथलाई चिरुथाइगल काची के अध्यक्ष थोल. थिरुमावलवन और नेशनल कॉन्फ्रेंस के सज्जाद अहमद किचलू भी याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं।

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कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल एसआईआर प्रक्रिया का शुरू से ही विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग ने भारतीय जनता पार्टी के दबाव में मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम काट दिये हैं। वे इसको लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे है। न्यायालय ने अल हिंद मुस्लिम इत्तेहाहुल मुसलमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने भी एसआईआर के विरुद्ध न्यायालय में अलग अलग याचिकाएं दायर की हैं।

याचिकाकर्ताओं ने एसआईआर कराने के संबंध में चुनाव आयोग के 24 जून, 2025 के फैसले के रिकॉर्ड को तलब किये जाने और यह तय करने का अनुरोध किया है कि इस प्रक्रिया में नियम कायदे का पालन हुआ है या नहीं । याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि इस मामले में यह न्यायिक समीक्षा भी की जाए कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 के तहत आयोग की निर्णय प्रक्रिया में सामूहिक दायित्व और दस्तावेजी निर्णय लेने की व्यवस्था का अनुपालन हुआ या नहीं।

याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूची से नाम हटाने तथा मतदाता सूची डेटाबेस का ऑडिट करने के लिए उच्चतम न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति बनाने की भी मांग की है। याचिकाकर्ताओं ने एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों से हटाए गए नामों और उन्हें हटाने के कारणों की बूथ-वार जानकारी दिये जाने, नाम हटाने से पहले नोटिस और सुनवाई , नाम वापस जोड़ने की व्यवस्था किये जाने, चुनाव वाले राज्यों में पंजीकरण की समय-सीमा बढ़ाये जाने और जब तक यह मामला चल रहा है, तब तक पूरे देश में एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने की भी मांग की है।

Pic Credit : UNI

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