नई दिल्ली। मेडिकल में दाखिले के लिए हुई नीट की परीक्षा के पेपर लीक होने और परीक्षा रद्द होने के मामले की सुनवाई सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई। पहले दिन की सुनवाई में सर्वोच्च अदालत ने परीक्षा कराने वाली केंद्र सरकार की नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीओ को कड़ी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा, ‘यह दुखद है कि एनटीए ने पहले हुए पेपर लीक मामले से कोई सबक नहीं लिया’।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने सोमवार को फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। इस दौरान बेंच ने कहा, ‘यह मामला 2024 में भी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। तब एक कमेटी बनाई गई थी, जिसने कई सिफारिशें दीं, जिन्हें स्वीकार भी किया गया था’। गौरतलब है कि 2024 में भी नीट की परीक्षा में कई जगह पेपर लीक होने और परीक्षा केंद्र पर धांधली की खबरें आई थीं। हालांकि उस समय पूरी परीक्षा रद्द नहीं की गई थी, बल्कि कुछ केंद्रों पर दोबारा परीक्षा हुई थी।
अब एक बार फिर 2026 की नीट परीक्षा के पेपर लीक हो गए, जिसके बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी। करीब 23 लाख छात्रों ने परीक्षा में हिस्सा लिया था, जिन्हें 21 जून को फिर से परीक्षा देनी पड़ेगी। इस मामले की सुनवाई करते हुए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनटीए गुरुवार तक हलफनामा दाखिल करे और बताए कि 2024 में दिए गए निर्देशों और मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशों पर क्या कदम उठाए गए। सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही केंद्र सरकार और इस मामकले की जांच कर रही सीबीआई से भी जवाब मांगा है।
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका में नीट यूजी की परीक्षा कराने के लिए एनटीए की जगह एक मजबूत और स्वायत्त व्यवस्था बनाने या फिर इसकी पूरी संरचना बदलने की मांग की है। इसमें कहा गया है कि बार बार पेपर लीक होने से लाखों छात्रों के मौलिक अधिकारों पर सीधा असर पड़ा है। याचिका में नई संस्था बनने तक एक हाई पावर मॉनिटरिंग कमेटी बनाने और दोबारा हो रही परीक्षा की निगरानी की भी मांग की गई है। कहा गया है कि इस कमेटी का अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज को बनाया जाए।
