नई दिल्ली। एक तरफ अमेरिका और इजराइल लगातार ईरान के ऊपर हमला कर रहे हैं तो दूसरी ओर खबर है कि ईरान पर लगी पाबंदियों में अमेरिका कुछ ढील दे सकता है। दुनिया में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति कम होने और कीमतें बढ़ने से परेशान अमेरिका ईरान को तेल की बिक्री में ढील देने पर विचार कर रहा है। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अमेरिकी मीडिया समूह ‘फॉक्स न्यूज’ से कहा है कि ईरान से जो तेल पहले से बाहर जा रहा है, अमेरिका उस पर लगी पाबंदियां कुछ समय के लिए हटा सकता है।
गौरतलब है कि ईरान पर भले अमेरिका की पाबंदियां लगी हुई हैं, लेकिन फिर भी ईरान कुछ देशों को चोरी, छिपे या खास तरीकों से तेल बेच रहा है। अमेरिका यह सोच रहा है कि जो तेल वैसे भी बाजार में आ रहा है, उस पर लगी पाबंदियों में कुछ समय के लिए ढील दे दी जाए, तो सप्लाई खुल कर बढ़ सकेगी और कीमतें कम हो जाएंगी। गौरतलब है कि अमेरिका पहले ही रूस से तेल खरीद की छूट दे चुका है। उसने दुनिया के सभी देशों को रूस से तेल खरीदने की छूट दी है।
इस बीच कतर के बाद ओमान ने ईरान पर हमले को लेकर अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने ईरान के साथ जंग को ट्रंप सरकार की ‘सबसे बड़ी गलती’ बताया है। उन्होंने कहा कि यह जंग वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचा रही है। अलबुसैदी ने यह भी कहा कि अमेरिका की विदेश नीति पटरी से उतरती दिख रही है और इस संघर्ष से किसी पक्ष को फायदा नहीं होगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि जल्दी से जल्दी इस जंग को खत्म कराने के लिए कदम उठाए जाएं। उधर जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि उनका देश तभी खाड़ी क्षेत्र में भूमिका निभाएगा, जब सैन्य कार्रवाई पूरी तरह खत्म हो जाएगी। ब्रसेल्स में यूरोपीय नेताओं की बैठक के दौरान मर्ज ने कहा, ‘हम तभी शामिल होंगे, जब बंदूकें शांत हो जाएंगी’।
