तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य सुष्मिता देव ने बुधवार को उच्च सदन की सदस्यता के साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के बाद उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात की, जिसके बाद उनके भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। वह इस सप्ताह राज्यसभा और तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने वाली पार्टी की दूसरी नेता हैं।
इससे पहले 8 जून को तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा सदस्यता और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि उनका यह निर्णय पश्चिम बंगाल में हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और जनता के जनादेश को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। रॉय के अनुसार राज्य की जनता ने पूरी तरह से टीएमसी को नकार दिया है। उन्होंने कहा कि इसका कारण राज्य में भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अपराध, शिक्षा, स्वास्थ्य, औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और कानून-व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में गिरावट है। इस वजह से जनता में टीएमसी को लेकर असंतोष बढ़ा।
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सुष्मिता देव के राजनीतिक जीवन की शुरुआत असम में कांग्रेस के साथ हुई थी। वह कांग्रेस के दिवंगत नेता संतोष मोहन देव की बेटी हैं। संतोष मोहन देव ने पूर्व प्रधानमंत्रियों राजीव गांधी, पी.वी. नरसिम्हा राव और डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया था।
सुष्मिता देव वर्ष 2014 से 2019 तक असम के बंगाली-बहुल सिलचर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस सांसद रहीं। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें भाजपा के राजदीप रॉय से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद अगस्त 2021 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने उन्हें पूर्वोत्तर राज्यों में तृणमूल कांग्रेस का संगठन विस्तार करने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
तृणमूल कांग्रेस की ओर से सुष्मिता देव दो बार राज्यसभा सदस्य रहीं। उनका पहला कार्यकाल अक्टूबर 2021 से अगस्त 2023 तक का था। इसके बाद अप्रैल 2024 में उनका दूसरा कार्यकाल शुरू हुआ था। हालांकि, उन्होंने छह वर्ष का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
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